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JPC की बैठक में एक देश एक चुनाव का प्रेजेंटेशन: अध्यक्ष चौधरी बोले- लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ होने से खर्च कम होगा
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नई दिल्ली4 घंटे पहले
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‘एक देश, एक चुनाव’ की JPC में शामिल भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मीटिंग का वीडियो X पर शेयर किया।
‘एक देश, एक चुनाव’ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि बैठक में सभी सदस्यों का सकारात्मक रुख था और वे एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं।
चौधरी ने कहा, ‘यह एक अच्छी बैठक थी। सभी सदस्यों का सकारात्मक रुख था। पहले जस्टिस अवस्थी ने प्रेजेंटेशन दिया। उसके बाद पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित ने विचार रखे।’
चौधरी ने कहा- हम सभी मिलकर एक टीम की तरह काम कर रहे हैं। संविधान संशोधन विधेयक, जो ‘एक देश, एक चुनाव’ के बारे में है, वर्तमान में संयुक्त संसदीय समिति के पास समीक्षा के लिए है। इस बिल का प्रस्ताव है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के समय सीमा को एक साथ किया जाए।
कई विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और DMK ने ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि चुनावों के समय को एक साथ लाने से चुनावों के खर्चों में कमी आएगी, लॉजिस्टिक चुनौतियां कम होंगी और बार-बार होने वाले चुनावों से होने वाली परेशानियों में भी कमी आएगी।
समान चुनाव पर उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने 18 सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी। संयुक्त संसदीय समिति की ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पर पहली बैठक 8 जनवरी को हुई थी।

दूसरी बैठक में शामिल होने के लिए जाते JPC के सदस्य।
31 जनवरी: दूसरी बैठक
JPC की दूसरी बैठक में बिल पर सुझाव लेने के लिए स्टेक होल्डर्स की लिस्ट बनाई गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट और देश के अलग-अलग हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, चुनाव आयोग, राजनीतिक दल और राज्य सरकारें शामिल हैं।
कमेटी शिक्षकों संगठनों और CII, फिक्की जैसे उद्योग समूहों बैंकों, RBI, बार काउंसिल से भी सुझाव लेगी। बैठक में सदस्यों से चर्चा की गई कि JPC के तय एजेंडे के साथ कैसे आगे बढ़ा जाए।
कॉन्स्टिट्यूशन एक्सपर्ट्स, सुरक्षा एजेंसियों, कई सरकारी विभागों, मीडिया संगठनों, लॉ कमीशन, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, पब्लिक सेक्टर्स, थिंक-टैंक, चैंबर ऑफ कॉमर्स, IIM जैसे संस्थानों के सुझाव लिए जा सकते हैं।
दूसरी बैठक में हुई चर्चा, पॉइंट्स में…
- प्रियंका गांधी वाड्रा ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर कई हितधारकों से बात करके व्यापक परामर्श की जरूरत है। सुप्रिया सुले समेत कई दूसरे विपक्षी दलों नेताओं ने इसका समर्थन किया।
- कमेटी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि शिक्षकों, छात्रों और प्रवासी श्रमिकों के विचार भी लिए जाएंगे।
- कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर जनता के बीच आम सहमति होनी चाहिए, क्योंकि इस तरह के कानून पर आखिरकार सबसे बड़े स्टेकहोल्डर आम आदमी ही होते हैं, जो वोट देते हैं।
- विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि उन्हें हर बैठक के दौरान हुई बातचीत की एक-एक कॉपी दी जाए। कमेटी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने इस मांग को खारिज कर दिया।
- DMK के पी विल्सन और कांग्रेस के मनीष तिवारी जैसे सदस्यों ने जोर देकर कहा कि उनकी मांग संसदीय समितियों के लिए मार्गदर्शक नियमों के तहत है।
- शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करने के सुझाव पर कुछ विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संयुक्त संसदीय समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

पहली बैठक के बाद भाजपा सांसद संबित पात्रा सूटकेस में रिपोर्ट ले जाते हुए।
8 जनवरी: पहली बैठक
JPC की पहली बैठक में सभी सांसदों को 18 हजार से ज्यादा पेज की रिपोर्ट वाली एक ट्रॉली दी गई थी। इसमें हिंदी और अंग्रेजी में कोविंद समिति की रिपोर्ट और अनुलग्नक की 21 कॉपी शामिल है। इसमें सॉफ्ट कॉपी भी शामिल है।
पहली बैठक की चर्चा, पॉइंट्स में…
- कानून मंत्रालय के प्रेजेंटेशन के बाद प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने एक साथ चुनाव कराने से खर्च कम होने के दावे पर सवाल उठाए थे।
- विपक्ष ने पूछा था कि क्या 2004 लोकसभा चुनाव के बाद खर्च का कोई अनुमान लगाया गया था, जब पहली बार सभी 543 सीटों पर EVM का इस्तेमाल किया गया और माना जाता है कि इससे खर्च कम हुआ था।
- विपक्ष ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के लिए कई राज्यों की विधानसभा उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग करने और उनका कार्यकाल लोकसभा के साथ जोड़ने से संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन होता है।
- भाजपा के संजय जायसवाल ने कहा कि 1957 में लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए 7 विधानसभाएं समय से पहले भंग की गई थीं। तब क्या तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, जो संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे, नेहरू और अन्य सांसदों ने संविधान का उल्लंघन किया था।
- भाजपा की सहयोगी पार्टी JDU ने सवाल किया कि क्या मध्यावधि चुनाव के बाद छोटे कार्यकाल के लिए चुनी गई सरकार में शासन के लिए वह फोकस होगा जो पांच साल के कार्यकाल वाली सरकारों में होता है।

संसद में बिल पेश करने के लिए वोटिंग कराई गई थी
कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने 17 दिसंबर को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव को लेकर 129वां संविधान संशोधन बिल पेश किया था। विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद बिल पेश करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कराई गई थी।
कुछ सांसदों की आपत्ति के बाद वोट संशोधित करने के लिए पर्ची से दोबारा मतदान हुआ। इस वोटिंग में बिल पेश करने के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े। इसके बाद कानून मंत्री ने बिल दोबारा सदन में रखा।
कांग्रेस बोली- बिल पेश करते समय सरकार 272 सांसद नहीं जुटा पाई
कांग्रेस ने एक देश एक चुनाव विधेयक को लेकर 20 दिसंबर को कहा कि भाजपा इस बिल को कैसे पास कराएगी? क्योंकि संविधान संशोधन के लिए उसके पास सदन में दो तिहाई बहुमत (362 सांसद) नहीं हैं। बिल भले ही JPC के पास भेजा गया, लेकिन कांग्रेस इसका विरोध करती है।
दरअसल, 20 दिसंबर को राज्यसभा में इस बिल से जुड़े 12 सदस्यों को नामित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया। सभापति जगदीप धनखड़ ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से राज्यसभा के सदस्यों को समिति में मनोनीत करने के लिए प्रस्ताव पेश करने को कहा था।
इसके बाद संसद की संयुक्त समिति को दोनों विधेयकों की सिफारिश करने वाला प्रस्ताव पारित किया गया। फिर बिल को 39 सदस्यीय JPC के पास भेजने का फैसला किया गया।

एक देश-एक चुनाव क्या है…
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे।
आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।
एक देश-एक चुनाव पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने करीब 191 दिनों में स्टेकहोल्डर्स और एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 14 मार्च, 2024 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी।
एक देश-एक चुनाव को लागू करने के लिए संविधान संशोधन के जरिए संविधान में 1 नया अनुच्छेद जोड़ने और 3 अनुच्छेदों में संशोधन करने की व्यवस्था की जाएगी।

संविधान संशोधन से क्या बदलेगा, 3 पॉइंट…
- संविधान संशोधन के जरिए अनुच्छेद- 82(A) जोड़ा जाएगा, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकें। वहीं, अनुच्छेद- 83 (संसद के सदनों का कार्यकाल), अनुच्छेद- 172 (राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल) और अनुच्छेद- 327 (विधानसभाओं के चुनाव से जुड़े कानून बनाने में संसद की शक्ति) में संशोधन किया जाएगा।
- बिल के जरिए प्रावधान किया जाएगा कि आम चुनाव के बाद लोकसभा की पहली बैठक की तारीख पर राष्ट्रपति नोटिफिकेशन जारी करेंगे। नोटिफिकेशन जारी करने की तारीख को अपॉइंटेड डेट कहा जाएगा। लोकसभा का कार्यकाल अपॉइंटेड डेट से 5 साल का होगा। लोकसभा या किसी राज्य की विधानसभा समय से पहले भंग होने पर बचे हुए कार्यकाल के लिए ही चुनाव कराए जाएंगे।
- बिल के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि यह पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक देश-एक चुनाव पर हाईलेवल कमेटी की सिफारिशों पर आधारित है। कोविंद कमेटी ने देश और राज्यों को चुनावों के साथ ही लोकल बॉडीज इलेक्शन कराने की भी सिफारिश की थी। हालांकि 12 दिसंबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इसे लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ था।
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एक देश-एक चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
क्या 2029 से देश में होगा वन इलेक्शन, फायदे-खामियों पर सब कुछ जो जानना जरूरी

आजाद भारत का पहला चुनाव 1951-52 में हुआ। उस वक्त लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे। 1957, 1962 और 1967 तक ये परंपरा जारी रही। अब 2029 में ये परंपरा फिर से शुरू हो सकती है। इससे जुड़ा बिल संसद में पेश हो सकता है। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस सवाल उठाए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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