Christmas 2024: ईसा मसीह का बर्थडे नहीं तो क्‍यों मनाते हैं क्र‍िसमस! सादे कपड़े पहनने वाले सेंटा क्लॉस को क‍िसने पहनाया ये लाल रंग?

Christmas 2024: ईसा मसीह का बर्थडे नहीं तो क्‍यों मनाते हैं क्र‍िसमस! सादे कपड़े पहनने वाले सेंटा क्लॉस को क‍िसने पहनाया ये लाल रंग?

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आखरी अपडेट:25 दिसंबर, 2024, दोपहर 1:40 बजे IST

Explainer- Christmas आ गया है. इस दिन हर जगह लाल रंग की चीजें सजी दिख जाती हैं. सेंटा क्लॉज भी रेड कलर की ड्रेस में दिखता है. क्रिसमस पर इस रंग का बहुत महत्व है.

1850 के बाद से अमेरिका में क्रिसमस ट्री को सजाने का रिवाज शुरू हुआ (Image-Canva)

मैरी क्रिसमस! आज चर्च और घरों के अलावा बाजारों और मॉल में लाल गुब्बारे, क्रिसमस ट्री और सेंटा क्लॉस सजे हुए हैं. 25 दिसंबर की तैयारी लोगों ने पहले ही कर ली थीं. दुनियाभर में आज का दिन बेहद खास है. यह त्योहार केवल ईसाई समुदाय ही नहीं बल्कि हर कम्युनिटी के लोग सेलिब्रेट करते हैं और पार्टी करते हैं. बाजारीकरण ने ही क्रिसमस को इतना पॉपुलर बनाया है. इस दिन एक खास रंग हमेशा देखने को मिलता है, वह है लाल रंग. इस रंग का क्रिसमस पर धार्मिक महत्व है.

कुर्बानी का रंग है लाल
25 दिसंबर को दुनियाभर में ईसाई समुदाय प्रभु ईसा मसीह का जन्मदिन मनाता है. उनका जन्म 6 ईसा पूर्व में माना जाता है लेकिन किस तारीख को हुआ इसका कहीं जिक्र नहीं है. ईसा मसीह करुणा और शांति का प्रतीक हैं लेकिन लाल रंग जीसस क्राइस्ट के खून को दिखाता है. ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था इसलिए यह रंग कुर्बानी और मुक्ति को दिखाता है. उनका जन्म नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना गया है और लाल रंग को इस घटना की यादों से जाेड़ा गया.

सेंटा क्लॉस के कपड़े लाल क्यों
1988 में इतिहासकार और लेखक Stephen Nissenbaum ने “क्रिसमस के लिए लड़ाई” नाम की किताब छापी. इसके अनुसार सेंटा क्लास कभी लाल रंग नहीं पहनता था. 19वीं शताब्दी तक सेंटा का लुक बहुत सिंपल था और वह आम लोगों की तरह ही कपड़े पहनता है. तुर्की के मायरा में पादरी संत निकोलस को पहला सेंटा क्लॉस माना जाता है. वह बच्चों को सेंटा बनकर तोहफे बांटते थे. सेंटा क्लॉस को लाल रंग की ड्रेस कोका-कोला कंपनी ने पहनाई. एक विज्ञापन में अपने ब्रांड को प्रमोट करने के लिए कंपनी ने ऐसा किया। 1934 से सेंटा क्लॉस लाल रंग की पोशाक पहनने लगा. हालांकि स्कैंडिनेवियाई देशों यानी उत्तरी यूरोप में आज भी फादर क्रिसमस जो सेंटा क्लॉस ही माने जाते हैं, वह हरे रंग का कोट पहनते हैं. हरा रंग प्रकृति का प्रतीक माना गया है.

क्रिसमस पर रूडोल्ड रेनडियर को सजाने का रिवाज कलरिंग बुक की ब्रिकी बढ़ाने के लिए किया गया (Image-Canva)

यह रंग ठंड को दूर करता है
मनोचिकित्सक मुस्कान कहती हैं कि क्रिसमस पर लाल रंग का इस्तेमाल मौसम की वजह से भी होता है. दरअसल दिसंबर के मौसम में अधिकतर देशों में ठंड होती है. यूरोप और अमेरिका जैसी जगहों पर बर्फ भी जमी होती है. ऐसे में लाल रंग की लाइट, बेरीज और रेनडियर की डेकोरेशन दूर से चमकती है. लाल रंग की यही खासियत है. इसकी विजिबल लाइट की वेवलेंथ बहुत लंबी होती है. इसलिए यह रंग बारिश या धुंध में भी नजर आ जाता है. सड़कों पर अधिकतर वार्निंग साइन बोर्ड इस रंग में इसलिए लिखे जाते हैं. रेड वॉर्म कलर भी है जिसे देखकर ठंड का एहसास खत्म हो जाता है.

त्योहारों के रंग के तौर पर पहचान
लाल एक फेस्टिव कलर है यानी त्योहारों का रंग. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार लाल खुशियों का रंग है. इस रंग को फेस्टिवल से लेकर सेरेमनी तक, हर जगह जोड़ा जाता है. त्योहार खुशियां लेकर आते हैं. हर कोई खुश होता है और लाल रंग देख लोग जोश से भर जाते हैं. यह रंग मूड को बूस्ट करता है. चूंकि यह रंग खुशी और सेलिब्रेशन से जुड़ा है इसलिए हर फिल्म के अवॉर्ड फंक्शन या पॉलिटिकल इवेंट का कार्पेट लाल रंग का होता है. वहीं, थिएटर और ओपेरा हाउस की सीटें भी लाल रंग की होती हैं.

भारत में ईसाई धर्म की शुरुआत केरल से हुई. त्रिशूर में पहला चर्च बनाया गया (Image-Canva)

25 दिसंबर को नहीं मनाया जाता था क्रिसमस
इतिहासकारों के अनुसार क्रिसमस का त्योहार चौथी सदी तक 6 जनवरी को मनाया जाता था. यह त्योहार केवल यूरोप में मनाया जाता था. चौथी सदी के बाद पश्चिमी देश भी क्रिसमस मनाने लगे और इस जश्न के लिए 25 दिसंबर का दिन तय किया गया. आज भी आर्मेनिया के एपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को ही क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है. विक्टोरिया युग में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया और उनके जर्मन हस्बैंड प्रिंस अल्बर्ट ने इंग्लैंड में जर्मनी की तरह क्रिसमस सेलिब्रेशन शुरू किया. उन्होंने ही इंग्लैंड में क्रिसमस ट्री, रेड बेरी, गिफ्ट देने जैसे रिवाज शुरू किया.

हिंदू धर्म में भी शुभ रंग है लाल
हिंदू धर्म में लाल रंग शुभ माना जाता है. लोग अपने घरों में लाल रंग से स्वास्तिक बनाते हैं. लाल मंगल का रंग है जो ऊर्जा को दिखाता है. कहते हैं कि यह रंग घर में पॉजिटिव एनर्जी को बढ़ाता है. लोग आलस छोड़कर मेहनत करते हैं. लाल को सुहाग का रंग भी माना जाता है इसलिए शादी में दुल्हन की मांग में लाल सिंदूर लगाया जाता है. मां लक्ष्मी का रंग भी लाल है. कहते हैं कि जो महिलाएं पैरों में लाल रंग का आल्ता लगाती हैं, मां लक्ष्मी उनसे खुश रहती हैं. भारतीय दुल्हनों की तरह चीन में भी दुल्हनें लाल रंग पहनती हैं. वहां लाल रंग को अच्छी किस्मत का प्रतीक माना गया है.

घरेलू जीवनशैली

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