99% बहनें गलत अंगुली से करती हैं भाई का तिलक, रक्षाबंधन पर छोटे और बड़े भाई को टीका लगाने के हैं अलग नियम, जानें पंडित जी की राय

99% बहनें गलत अंगुली से करती हैं भाई का तिलक, रक्षाबंधन पर छोटे और बड़े भाई को टीका लगाने के हैं अलग नियम, जानें पंडित जी की राय

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हाइलाइट्स

रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के रिश्ते के लिए खास है.राखी बांधने से पहले बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है.

सावन मास 2024: श्रावण मास चल रहा है और इसका समापन रक्षाबंधन के पवित्र पर्व के साथ होगा. हर साल यह त्योहार सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है जो कि इस वर्ष 19 अगस्त 2024, दिन सोमवार को पड़ रही है. यह त्योहार भाई बहन के रिश्ते के लिए खास है और इसका इंतजार दोनों ही साल भर करते हैं. यही वो खास दिन है जब बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षाकवच यानी कि राखी बांधकर उसके सुखी जीवन की कामना करती है. आपको बता दें कि, राखी बांधने से पहले बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है लेकिन कई बहनें जानकारी के अभाव में तिलक गलत तरीके से लगाती हैं. वहीं तिलक लगाते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी होता है. साथ ही आप किस अंगुली से तिलक कर रही हैं? यह भी महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं तिलक से जुड़ी जरूरी बातें भोपाल निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित योगेश चौरे से.

किस अंगुल से करें तिलक?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, भाई के माथे पर तिलक लगाते समय सबसे महत्वपूर्ण यह कि आप तिलक के लिए किस अंगुली का चयन कर रही हैं. यदि भाई बड़ा है और बहन छोटी तो कनिष्ठ उंगली से तिलक करना चाहिए. यह वही अंगुली है जिसे रिंग फिंगर के नाम से जाना जाता है और इसी में सगाई की अंगूठी भी पहनाई जाती है. वहीं यदि भाई छोटा है और बहन बड़ी तो बहन को अंगूठे से तिलक करना चाहिए.

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सही अंगली से तिलक के फायदे
शास्त्रों के अनुसार, जब बहन रक्षाबंधन के दिन तिलक के लिए सही उंगली का चयन करती है तो उसके भाई के जीवन पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. जब छोटी बहन कनिष्ठ उंगली से बड़े भाई का तिलक करती है तो उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

जब बड़ी बहन अपने छोटे भाई को अंगूठे से तिलक लगाती है तो उसके जीवन में तरक्की होती है. वह हर कार्य में सफलता पाता है साथ ही वह निर्भीक बनता है.

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इस बात का भी रखें ध्यान
इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि तिलक हमेशा एक सीध में लगाएं आड़ा-टेढ़ा नहीं. साथ ही तिलक के बाद चावल अवश्य लगाएं क्योंकि इसके बिना तिलक अधूरा माना जाता है.

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