20 सेकेंड में दागता है 40 रॉकेट, चीन-पाक को देगा माकूल जवाब, आ गया मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर का नया अवतार

20 सेकेंड में दागता है 40 रॉकेट, चीन-पाक को देगा माकूल जवाब, आ गया मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर का नया अवतार

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आखरी अपडेट:21 जनवरी 2025, 7:04 अपराह्न IST

INDIAN ROCKET FORCE: गॉड ऑफ वॉर के नाम से मशहूर आर्टिलरी भारतीय सेना की बैकबोन है. भारतीय सेना के तोपखाने में मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर भी शामिल है. दुनिया के कई देशों में अलग से रॉकेट फोर्स है. भारतीय सेना भी बड…और पढ़ें

मल्टी बैरल रॉकेट लॉंचर है गॉड ऑफ वार

भारतीय रॉकेट बल: चीन ने अपनी पीएलए आर्मी, एयरफोर्स और रॉकेट फोर्स को एलएसी की दूसरी ओर तिब्बत में तैनात किया हुआ है. चीन को अपने रॉकेट फोर्स को लेकर बहुत घमंड है लेकिन भारतीय सेना भी चीन के इस घमंड को चूर करने के लिए तैयार है. भारत ने भी अपनी रॉकेट फोर्स को पूरी LAC पर तैनात किया है. इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में भारतीय सेना के मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर ग्रैड का नया अवतार दिखाई देगा. हथियार पुराना है लेकिन ताकत बिलकुल नई है.

ग्रैड हुआ अपग्रेड
पुरानी ग्रेड को और ताकत देने के लिए भारतीय सेना ने इसकी गाड़ी को ही नया कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रैड के लॉन्चर अभी पूरी तरह से फायरिंग के लिए फिट हैं. लेकिन जिस रूसी 6 x 6 Ural कैरियर पर यह सिस्टम लगा था वह पुरानी हो चली थी. भारतीय सेना ने इस गाड़ी को बदलते हुए इसकी जगह अशोक लीलैंड की सुपर स्टैलिअन 6 x 6 ट्रक पर इसे फिट कर दिया. हर रॉकेट का वजन 65 किलों के करीब होता है. जब 40 रॉकेट एक के बाद एक दागे जाते हैं तो सबसे ज्यादा दबाव गाड़ी पर ही होता है. ग्रैड की इस नई गाड़ी में भी शॉकर लॉक किया जाता. इससे गाड़ी के टायर जाम हो जाते है, इसमें पिनाका जैक हाइड्रोलिक जैक नहीं होता है. कर्तव्य पथ पर दिखाई देने वाली BM-21 ग्रैड लॉन्चर तो पुराना ही है, कैरियर बिलकुल नया है.

घातक है ग्रैड
तकरीबन 4 दशक पहले भारत में रूस से ग्रैड की खरीद की थी. यह ग्रैड कारगिल की जंग के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों पर भी खूब बरसी. इसकी मारक क्षमता की बात करें तो यह 50 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है. इसमें 122 mm का रॉकेट फायर किया जाता है. इस सिस्टम में 40 लॉन्च ट्यूब होते हैं. महज 20 सेकेंड में 40 रॉकेट फायर हो जाते हैं. यानी हर एक सेकेंड में 2 रॉकेट. जिस वक्त रॉकेट लांचर ट्यूब से निकलती है तो उसकी स्पीड 2520 किलोमीटर प्रति घंटा यानी की 2 मैक से भी ज्यादा रफ्तार होती है. चूंकि इस सिस्टम की एक और खास बात यह है कि एक बार फायर होने के बाद इसे दोबार से लोड करना भी बेहद आसान है. खड़े लॉन्चर में रॉकेट भरे जा सकते हैं लेकिन पूरे लॉन्चर ट्यूब को ट्रक से हटाकर दूसरा लोडेड लॉंचर गाड़ी पर रखा जा सकता है. अगर यह काम मैनुअल हो तो 30 मिनट का वक्त लगता है, और अगर मशीन के चरिए हो तो महज 15 मिनट में फिर से रॉकेट फायर होने के लिए तैयार हो जाते है. भारतीय सेना के पास 5 यूनिट है . हर यूनिट में 3 बैटरी है और हर बैटरी में 6 लॉन्चर है. हर यूनिट में कुछ रिजर्व लॉन्चर भी है. कुल मिलाकार 150 के करीब ग्रैड रॉकेट लॉन्चर है. BM-21 के एक रॉंकेट की कीमत तकरीबन 5-6 लाख रुपये के करीब बताई जाती है.

भारतीय रॉकेट फोर्स की ताकत पिनाका
पिनाका रॉकेट लॉन्चर स्वदेशी है. पिनाका की एक बैटरी में 6 फायरिंग यूनिट यानी लॉन्चर होती है. एक लॉन्चर में 12 ट्यूब होती है यानी की एक बैटरी में कुल मिलाकर 72 रॉकेट होते हैं. महज 44 सेकेंड यह सारे रॉकेट लॉन्च हो जाते हैं. लॉन्चिंग के तुरंत बाद से लॉन्चर अपना लोकेशन बदलते हैं और फिर दोबारा से आर्मड हो जाते है. पिनाका की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है. एक साथ पूरी बैटरी दागने पर दुश्मन के 1000 X 800 मीटर के इलाके को पूरी तरह से तहस नहस कर सकता है. इसका एक राउंड तकरीबन 25-30 लाख रुपये के करीब बताया जाता है. हर रॉकेट का वजन 278 किलों है. फिलहाल भारतीय सेना के पास पिनाका कि 4 रेजिमेंट है. हर रेजिमेंट में 3 बैटरी और हर बैटरी में 6 लॉन्चर है. साल 2027 तक सेना में इसकी रेजिमेंट का संख्या 10 हो जाएगी. पिकाना का नया अवतार पर भी काम जारी है. पिनाका एक्टेंडेड रेंज का सफल परिक्षण किया जा चुका है. इसकी रेंज को 37 किलोंमीटर से 75 किलोमीटर किया जा रहा है. इसकी रेंज को 120 और 300 किलोमीटर तक करने के लिए काम होना है.

स्मर्च का रॉकेट है सबसे महंगा
भारतीय आर्टेलरी रेजिमेंट में सबसे लंबी मार करने वाले रॉकेट लॉन्चर है रूस की ‘स्मर्च’. इसकी 3 ऑपरेशनल रेजिमेंट भारतीय सेना के पास है. इसकी मारक क्षमता है 90 किलोमीटर से ज्यादा है. इसकी एक बैटरी में चार लॉन्चर होते हैं. हर लॉंचर में 12 ट्यूब है यानी की एक बैटरी में 48 राकेट है. यह सारे रॉकेट महज 40 सेकेंड में दुश्मन पर टूटने के लिए ट्यूब से निकल जाएंगे. स्मर्च की एक बैटरी दुश्मन के 1200 X 1200 मीटर के इलाके में तैनात हर तहर के इंस्टॉलेशन को जमींदोज कर सकता है. इसके रॉकेट की कीमत की बात करें तो बताया जाता है कि एक रॉकेट 90 लाख से 1 करोड़ के करीब का है. इसे भारत आज भी रूस से ही खरीदता है. जब्कि ग्रैड के रॉकेट को वह भारत में ही बनाने में सफलता हासिल कर ली है.

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