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हर साल डूबती है दिल्ली की कोचिंग मंडी: लाहौर से भारत आए लोगों के लिए बसा था राजेंद्र नगर; कोचिंग खुलने से कमर्शियल एरिया बना
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1 दिन पहलेलेखिका: उत्कर्षा त्यागी
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दिल्ली की राउ अकेडमी की बेसमेंट में चल रही एक लाइब्रेरी में पिछले दिनों बारिश का पानी घुस गया और तीन स्टूडेंट्स की डूबकर मौत हो गई। इसके बाद से ही यहां तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स उदासीन प्रशासन के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे हैं।
इसी हादसे की कवरेज के लिए मैं मेट्रो पकड़कर करोल बाग मेट्रो स्टेशन पहुंची। स्टेशन से निकलते ही चारो ओर कोचिंग सेंटर्स, हॉस्टल्स, लाइब्रेरी आदी के इश्तेहार लगे थे। यहां तक की स्टेशन का नाम ही ‘दृष्टी IAS -करोल बाग’ हो गया है।

दिल्ली मेट्रो के ‘करोल बाग’ मेट्रो स्टेशन को अब ‘दृष्टि IAS करोल बाग’ कहा जाता है।
तंग गलियों में या तो स्टूडेंट्स दिख रहे थे या कोचिंग सेंटर्स के इश्तिहार जो बेस्ट तैयारी का वादा कर रहे हैं। आगे बढ़ी तो कुछ घर नजर आए जो शायद बनाए गए थे फैमिली के हिसाब से। लेकिन अब यहां बड़े-बड़े बोर्ड लगे हैं- ‘टू- लेट’ या ‘पीजी के लिए संपर्क करें’।
300 छात्रों के लिए लगभग उतनी ही पुलिस
आखिरकार मैं हादसे वाली जगह पर पहुंची। यहां करीब 300 स्टूडेंट्स इकट्ठा थे। ये सभी स्टूडेंट्स देशभर से यहां आए तो थे UPSC की तैयारी कर सिस्टम का हिस्सा बनने के लिए। मगर फिलहाल सिस्टम के खिलाफ खड़े हैं। लगभग इतनी ही संख्या में यहां पुलिस बल भी तैनात दिखा।
एक महिला पुलिसकर्मी से बातचीत में पता चला कि आसपास के कई थानों से पुलिस बुलाई गई थी। मात्र 300 छात्रों को रोकने के लिए तीन जगह बैरिकेडिंग भी की गई थी। इसके अलावा जिस लाइब्रेरी में हादसा हुआ उसे सील कर दिया गया। वहां न तो किसी मीडियाकर्मी और न ही किसी स्टूडेंट को जाने दिया जा रहा था।

हादसे के बाद राउ कोचिंग के बेसमेंट को सील कर दिया गया।
लाइब्रेरी में जाने से रोकने के लिए खड़े पुलिसवालों में से एक सनी सिंह से जब मैंने पूछा कि ये लाइब्रेरी में जाने क्यों नहीं दिया जा रहा तो उसके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। उसने प्रोटोकॉल और ऊपर से ऑर्डर का हवाला देकर मुझे रफा-दफा कर दिया।
हादसे के बाद MCD को होश आया
इसी बीच MCD की कई गाड़ियां और बुलडोजर भी वहां पहुंच गए। पता चला कि इलाके में नालों के ऊपर इन्क्रोचमेंट किया गया था। जिसकी वजह से बारिश का पानी बह नहीं पाया और बेसमेंट में भर गया जिससे तीन स्टूडेंट्स की मौत हो गई। इसके बाद अब MCD सतर्क हो गया और पहुंच गया इन्क्रोचमेंट हटाने। हालांकि इन्क्रोचमेंट के नाम पर दुकानों और कोचिंग सेंटर्स के आगे बने रैम्प को तोड़कर ही काम पूरा कर लिया गया। इसके अलावा बेसमेंट में चलने वाली सभी लाइब्रेरी और 13 कोचिंग सेंटर्स सील किए जा चुके हैं।

हादसे के अगले ही दिन MCD ने ओल्ड राजेंद्र नगर में कई जगह बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाए।
हालांकि इसपर स्टूडेंट्स ने कहा कि ये एक्शन सिर्फ कुछ दिनों के लिए है। मामला ठंडा होते ही सभी कोचिंग सेंटर्स और बेसमेंट में चल रही लाइब्रेरी पहले की ही तरह चालू हो जाएंगी। पिछले साल मुखर्जी नगर के संस्कृति कोचिंग सेंटर में आग लगी थी। इसके बाद भी छात्र कोचिंग सेंटर्स और प्रशासन की लापरवाही को लेकर धरने पर बैठे थे। कुछ दिनों के लिए कई कोचिंग सेंटर्स को बंद भी किया गया और फायर सेफ्टी जैसे कई बड़े-बड़े शब्द सुनने को मिले। लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हुआ। कुछ दिन बाद वो सभी कोचिंग सेंटर्स वापस शुरू कर दिए गए थे।
रिफ्यूजी कॉलोनी था राजेंद्र नगर
राजेंद्र नगर के अलग-अलग कोचिंग सेंटर्स में पिछले 15 साल से काम कर रहे उमेश प्रसाद ने कहा कि आजादी के समय जब बंटवारा हुआ तो लाहौर से ढेरों सिख और हिंदू दिल्ली चले आए। इन्हीं लोगों के लिए यहां पटेल नगर, राजेंद्र नगर, लाजपत नगर जैसी कॉलोनी बसाई गई थीं।
1995 तक ये पूरा एरिया रेजिडेंशियल हुआ करता था। फिर 1997 के आसपास यहां कोचिंग सेंटर्स शुरू हुए। दिल्ली यूनिवर्सिटी से निकलकर स्टूडेंट्स सिविल सर्विस की तैयारी के लिए यहां आने लगे। इसके अलावा टीना डाबी जैसे कई सक्सेसफुल कैंडिडेट्स दिल्ली से निकले तो देशभर के स्टूडेंट्स भी दिल्ली का रुख करने लगे। इसके बाद रेजिडेंशियल एरिया कमर्शियल एरिया बन गया। रहने-खाने के लिए बनाए गए घर किराए के लिए तैयार किए गए। लेकिन प्रशासन ने इसके लिए कोई तैयारी नहीं की। ड्रेनेज सिस्टम पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
उमेश ने कहा कि पिछले 15 सालों से यहां काम करता हूं। हर साल बारिश होने पर यहां इतना पानी भर जाता है कि फोर व्हीलर कार आराम से पानी में समा सकती है।

इन्हीं जर्जर इमारतों में स्टूडेंट्स की क्लासेज चलती हैं।
लगातार शिकायत कर रहे स्टूडेंट्स पर कोई एक्शन नहीं
किशोर कुमार कुशवाहा नाम के एक स्टूडेंट ने 26 जून को ही इस लाइब्रेरी के अवैध होने की शिकायत की थी। इसके बाद 27 जुलाई को हुई घटना से तीन दिन पहले 24 जुलाई को कनिष्का तिवारी नाम की एक एस्पिरेंट ने भी वॉटर लॉगिंग की शिकायत दर्ज कराई थी।
कनिष्का ने कहा कि कुछ ही समय पहले निलेश राय नाम के एक एस्पिरेंट की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी। किसी ने तब समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। मैं बुराड़ी से हर दिन घंटों ट्रैवल करके कोचिंग के लिए आती हूं। एक दिन जब आई तो देखा जरा सी बारिश में यहां पानी भर गया। इसके अलावा कई जगह बिजली के तार भी पानी को टच कर रहे थे, तब मैंने शिकायत की।
कई अधिकारियों के कॉल भी आए कि हम तुरंत इसपर एक्शन लेंगे। लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। अगर तब ही एक्शन ले लिया गया होता तो ये हादसा नहीं होता। अब हम इतनी महंगी फीस देते हैं, दूर-दूर से आते हैं लेकिन हमारी सेफ्टी के लिए कोई सीरियस ही नहीं है। कल को हमें भी सिविल सर्विस जॉइन करके इसी सिस्टम का पार्ट बनना है। लेकिन आज सिस्टम का बुरा हाल देखकर निराशा होती है। कोई इंस्पिरेशन नहीं है हमारे लिए।
शिफ्टों में धरना दे रहे स्टूडेंट्स
हादसे में एक स्टूडेंट नेविन डेल्विन की मौत हो गई। उनके दोस्त महाराष्ट्र के विशान शिंदे ने बताया – नेविन और मैं CSAT की कोचिंग साथ कर रहे थे। वो ब्राइट स्टूडेंट था। JNU से उसकी PhD भी चल रही थी। रहने वाला केरल का था वो और उसके पिताजी पुलिस में काम करते हैं। हर दिन की तरह वो पढ़ने के लिए लाइब्रेरी आया हुआ था। हम लोग उसे कॉल कर रहे थे, लेकिन पिक नहीं किया। हमें लगा कि शायद फोन रूम पर छोड़कर बारिश में घूमने निकला है। लेकिन जब ग्रुप पर उसकी फोटो देखी कि वो लापता है तो शॉक हो गए। पहले तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि जिससे सुबह मिला हूं वो अब शायद दुनिया में नहीं रहा, उससे अब कभी नहीं मिल पाऊंगा।
विशान ने आगे बताया कि ये पूरा हादसा लाइब्रेरी चलाने वाले, लाइब्रेरी किराए पर देने वाले और प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। और ये कोई अकेली ऐसी लाइब्रेरी नहीं है। यहां ऐसी ढेरों लाइब्रेरी और कोचिंग क्लासेज हैं जहां किसी भी वक्त हादसा हो सकता है। इसी के खिलाफ हम सभी शिफ्ट लगाकर धरना दे रहे हैं।
मुखर्जी नगर का भी बुरा हाल
राजेंद्र नगर के बाद मैं मुखर्जी नगर पहुंची। यहां की गलियां राजेंद्र नगर से भी ज्यादा तंग मिलीं। यहां पहली बार बॉक्स रूम का कल्चर देखा। बेसिकली एक बड़े रूम को कार्डबोर्ड या प्लासटिक के तख्तों से डिवाइड करके छोटे-छोटे कई रूम्स बना दिए जाते हैं। इन्हें बॉक्स रूम कहते हैं। ढेरों एस्पिरेंट्स इन 4 बाय 4 के कमरों में सालों गुजार देते हैं। जगह की अहमियत यहां इतनी है कि स्टेशनरी और किताबों की दुकान ठेलों या जमीन पर ही लगाई जाती है।

किताबें और स्टेशनरी यहां सड़क किनारे ही बिकती मिल जाती हैं।
पक्की दुकानों में या तो कोचिंग क्लास चलती है या बच्चों के रहने के लिए हॉस्टल बना दिए गए हैं। यहां भी बेसमेंट में अनेकों क्लासेज, हॉस्टल और लाइब्रेरी चल रही है।
हालांकि घटना के बाद प्रशासन ने इनपर सील लगाई है। मगर ये सील कब तक रहेगी और स्टूडेंट्स ने जो यहां फीस भरी है उसका क्या होगा, किसी को कोई खबर नहीं है।
संकरा नाला है पिकनिक स्पॉट
एस्पिरेंट्स बंद कमरों से निकलते हैं लाइब्रेरी और क्लासेज के दूसरे बंद कमरों में घुसने के लिए। यहां पॉपुलेशन डेंसिटी इतनी ज्यादा है कि ऐसा लगता है ऑक्सीजन की कमी हो रही है। इसीलिए शायद शाम के समय सभी स्टूडेंट्स मुर्गी के दड़बेनुमा कमरों से बाहर निकलते हैं। लेकिन बाहर निकलने के बाद भी उनके पास जाने के लिए कोई बेहतर जगह नहीं है।

मुखर्जी नगर और नेहरू विहार के बीच ये छोटा पुल है। यहीं एस्पिरेंट्स शाम के समय हैंगआउट करते हैं।
मुखर्जी नगर और नेहरू विहार के बीच के पतले नाले के पास ही सब बैठ जाते हैं। नाले की बदबू और बदसूरती उन्हें शायद कमरे और क्लासरूम से बेहतर लगती है। और अगर नहीं भी लगती तो जाने के लिए और कोई जगह नहीं है। पूरे इलाके में एक ये नाला ही थोड़ा खुला है जहां शायद खुलकर सांस आ पाती है।
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