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संजय लीला भंसाली@62, फिल्म में पैसा लगाकर बर्बाद हुए पिता: घर खर्च के लिए मां ने कपड़े सिले; गुस्से की वजह से FTII से निकाला
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27 मिनट पहलेलेखक: तान्या अग्रवाल
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संजय लीला भंसाली, आज ये नाम फिल्म इंडस्ट्री के बड़े डायरेक्टरों में शुमार है। भंसाली आज 62 साल के हो गए हैं। 300 स्क्वायर फीट की चॉल में बेरंग दीवारों के बीच गुजारा करने वाले भंसाली, आज भारतीय सिनेमा के सबसे भव्य सेट्स और परफेक्शनिस्ट अप्रोच के लिए जाने जाते हैं।
संजय की फिल्मों में सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि हर फ्रेम एक चलती-फिरती पेंटिंग होती है। 940 करोड़ रुपए के मालिक भंसाली ने फिल्म इंडस्ट्री के करियर में करीब 10 फिल्मों का डायरेक्शन किया, 7 फिल्मों में बतौर प्रोड्यूसर, 3 फिल्मों में म्यूजिक डायरेक्टर और 16 फिल्मों में राइटर के तौर पर काम किया। लेकिन संजय लीला भंसाली का फिल्म इंडस्ट्री में आना आसान नहीं था।
भंसाली के 62वें जन्मदिन के मौके पर जानेंगे उनके डायरेक्शन और परफेक्शन से जुड़े किस्से….

चॉल में जन्म हुआ, कहा था- दीवारें भी बेरंग थीं
संजय लीला भंसाली फिल्मों में अपने आलीशान और भव्य सेट के लिए जाने जाते हैं, लेकिन एक समय था जब वो खुद चॉल में रहते थे। उन्होंने कुछ समय पहले ही हॉलीवुड रिपोर्टर से बातचीत में अपने बचपन के संघर्ष को याद किया था। उन्होंने कहा था-
मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मैं बिना किसी सुख-सुविधा वाले घर में पैदा हुआ। मैं 300 स्क्वायर फीट के चॉल में पैदा हुआ। खुद को इसलिए भी भाग्यशाली मानता हूं क्योंकि मेरा जन्म ऐसे पिता के घर हुआ, जो अपने पीछे कई अधूरे सपने छोड़ गए। मैं जिस चॉल में रहता था, वहां दीवारें भी बेरंग थीं, छोटी सी जगह में हम 4-5 लोग रहते थे। मैंने बचपन से ही यही बात सुनी थी कि सिनेमा में पैसे लगाना बेकार है।

पिता ने फिल्म में पैसे लगाए, परिवार को झेलनी पड़ी आर्थिक तंगी
इसी इंटरव्यू में संजय लीला भंसाली ने फिल्मों को अपनी आर्थिक तंगी का कारण भी माना। उन्होंने कहा- मेरे पिता ने जहाजी लुटेरा नाम की फिल्म में पैसा लगाया था, जो मेरे पैदा होने से पहले रिलीज हुई थी। जब मैं पैदा हुआ और बड़ा हो रहा था तो मैंने अपनी फैमिली से हमेशा यही सुना कि सिनेमा में पैसे नहीं लगाना चाहिए। हम सिनेमा की वजह से ऐसी सिचुएशन में पहुंच गए हैं। मेरे घर में शुरू से ही सिनेमा को काफी तवज्जो दी जाती है। मेरी दादी ने एक बार 10 हजार रुपए इकट्ठा किए थे। उन्होंने ये पैसे मेरे पिता के दोस्त को दिए थे, जो एक फिल्म प्रोड्यूस कर रहे थे। वो पैसे हमें कभी वापस नहीं मिले। जिसके बाद मैंने सोच लिया था कि बहुत पैसे कमाने हैं और परिवार को वो 10 हजार रुपए सूद समेत लौटाने हैं।

मां लीला और बहन बेला भंसाली सहगल के साथ संजय।
मां को छोटी जगहों में डांस करते देख ठाना- मेरी एक्ट्रेसेस बड़े सेट पर डांस करेंगी
संजय लीला भंसाली के पिता ने जब फिल्मों में पैसे लगाए तो परिवार को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा। ऐसे में घर खर्च और गुजारे के लिए उनकी मां सिलाई का काम किया करती थीं। उनकी मां छोटे कार्यक्रमों में डांस भी किया करती थीं। कभी-कभी भंसाली भी कार्यक्रमों में अपनी मां की परफॉर्मेंस देखने जाते थे। एक दिन उन्होंने मां को छोटी सी जगह पर डांस करते देखा, जिसके बाद उन्होंने ठान लिया था कि जब भी वो फिल्म मेकर बनेंगे तो उनकी फिल्म की एक्ट्रेसेस हमेशा बड़े सेट पर डांस करेंगी।

गुस्से की वजह से FTII से निकाले गए संजय लीला भंसाली
संजय लीला भंसाली ने टाइम्स ऑफ इंडिया से एक पुरानी बातचीत में अपने पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट का किस्सा शेयर किया था। उन्होंने बताया था- मैंने पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट में एडिटिंग कोर्स में एडमिशन लिया था। इस कोर्स को पूरा करने के बाद मैंने डिप्लोमा के लिए एडमिशन लिया था। लेकिन तभी मुझे इंस्टीट्यूट से निकाल दिया गया था और मैं अपना डिप्लोमा पूरा नहीं कर पाया था।
दरअसल, मैं वहां एडिटिंग का स्टूडेंट था, हमारे लिए डायरेक्शन की क्लास नहीं होती थी। एक दिन हर स्टूडेंट के लिए एक डायरेक्टर को बुलाया गया, जिनकी फिल्में हमें एडिट करनी थीं। मुझे दिलीप घोष की फिल्म मिली थी, लेकिन मुझे उनके साथ काम करने में कुछ परेशानी थी, इसीलिए मैंने अपने इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर के.जी. वर्मा से कहा कि मुझे किसी दूसरे डायरेक्टर की फिल्म दे दी जाए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी बात को लेकर थोड़ी बहस हो गई और मैंने कोर्ट में केस कर दिया, जिसमें मैं हार गया। इसके बाद मैं वर्मा सर के पास गया और गिड़गिड़ाया कि मुझे मेरी डिप्लोमा फिल्म पूरी करने दें, लेकिन वे नहीं माने और मुझे इंस्टीट्यूट से निकाल दिया। मैं बहुत गुस्से में था और सोच लिया था कि मुंबई जाकर अपनी फिल्म बनाऊंगा। हालांकि आज भी मुझे डिप्लोमा नहीं कर पाने का अफसोस है। यही वजह है कि मैं अभी भी खुद को अधूरा फिल्ममेकर मानता हूं।
कैसे फिल्मों से जुड़ा संजय लीला भंसाली का रिश्ता?
संजय लीला भंसाली का नाम आज इंडस्ट्री के बड़े फिल्ममेकर्स में शुमार है। लेकिन एक समय ऐसा था जब उनका फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ना नामुमकिन था। ये तब मुमकिन हो सका जब संजय लीला की बहन ने विधु विनोद चोपड़ा की एक्स वाइफ रेनू चोपड़ा के सामने उनके काम की तारीफ की। जिसके बाद रेनू चोपड़ा ने विधु विनोद चोपड़ा को संजय लीला को काम देने के लिए मजबूर किया था। दरअसल, संजय लीला भंसाली की बहन बेला भंसाली सहगल विधु विनोद चोपड़ा के साथ काम करती थीं।

संजय लीला भंसाली ने विधु विनोद चोपड़ा के साथ 8 साल तक काम किया।
पहले विधु विनोद चोपड़ा ने संजय लीला को रिजेक्ट कर दिया। फिर बाद में उन्होंने उनको अपने साथ काम करने का मौका दिया। संजय लीला ने उनके साथ 8 साल तक काम किया। उन्होंने विधु विनोद चोपड़ा के साथ बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया।
संजय लीला भंसाली ने विधु विनोद चोपड़ा के साथ काम करने का एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया था- “मुझे लगता है कि उनके साथ 8 साल तक काम करने के बाद मैं दुनिया की किसी भी सिचुएशन का सामना कर सकता हूं। आज भी अगर विधु विनोद चोपड़ा का कॉल आता है तो मैं खड़ा हो जाता हूं। यह मेरा उस व्यक्ति के प्रति सम्मान है जिसने मेरी जिंदगी बदल दी।”
पहली फिल्म खामोशी: द म्यूजिकल को मिले 5 फिल्मफेयर अवॉर्ड
संजय लीला भंसाली ने विधु विनोद चोपड़ा के साथ फिल्म परिंदा (1989) में बतौर असिस्टेंट, 1942: ए लव स्टोरी (1994) में बतौर राइटर-असिस्टेंट कोरियोग्राफर में काम किया।
विधु विनोद चोपड़ा चाहते थे कि संजय लीला भंसाली उनके प्रोडक्शन की फिल्म करीब डायरेक्ट करें, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। इस इनकार का असर उनके रिश्ते पर पड़ा।
इसके बाद संजय लीला भंसाली ने साल 1996 की फिल्म खामोशी द म्यूजिकल से बतौर डायरेक्टर बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो कोई खास कमाल नहीं कर सकी, हालांकि इसे क्रिटिक्स की जमकर तारीफें मिलीं। इस फिल्म ने उस साल 5 फिल्म फेयर अवॉर्ड अपने नाम किए थे। आगे उन्होंने हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक जैसी बेहतरीन फिल्में डायरेक्टर कर खुद को बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन डायरेक्टर्स में शामिल किया।

संजय लीला भंसाली की फिल्मों और परफेक्शन से जुड़े किस्से-
संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों की कहानी के साथ-साथ परफेक्शन, आलीशान सेट, एक्टर्स के कॉस्ट्यूम और म्यूजिक पर भी ध्यान देते हैं। ये उनकी कई फिल्मों में देखने को मिला है।
भंसाली ने साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म देवदास के भव्य सेट को बनाने में 9 करोड़ रुपए लगाए थे। वहीं, 2018 में रिलीज हुई फिल्म पद्मावत के सेट को बनाने में 250 करोड़ रुपए की लागत लगी थी। फिल्म में दीपिका पादुकोण के महारानी लुक पर भी भंसाली ने बहुत खर्च किया था। दीपिका ने जो ज्वेलरी पहनी थी उसे 200 कारीगरों ने 600 दिनों में बनाया था। इतना ही नहीं घूमर गाने की मेकिंग में 12 करोड़ का खर्च आया था। साल 2022 को रिलीज हुई फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी के सेट को बनाने में लगभग 7 करोड़ रुपए का खर्चा आया था। इस सेट को बनाने में 5 से 6 महीने लगे थे।

वेब सीरीज हीरामंडी का सेट संजय लीला भंसाली के करियर का अब तक का सबसे बड़ा सेट है।
वहीं, साल 2024 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की पहली वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ के सेट को बनाने में लगभग 200 करोड़ रुपए का खर्च आया था। 3 एकड़ में फैला यह सेट भंसाली के करियर का अब तक का सबसे बड़ा सेट रहा। सेट को बनाने में 700 कारीगरों ने 210 दिनों तक काम किया था। वहीं इस सीरीज का सीक्वल हीरामंडी 2 जल्द ही रिलीज होने वाला है। सीरीज की शूटिंग जारी है।
सलमान के बयान से आहत हुए थे संजय लीला भंसाली
सलमान खान और संजय लीला भंसाली का रिश्ता काफी लंबे समय तक उतार-चढ़ाव भरा रहा। दोनों ने साथ में खामोशी: द म्यूजिकल (1996) और हम दिल दे चुके सनम (1999) जैसी फिल्में की थीं, लेकिन बाद में सलमान खान के एक बयान से दोनों के बीच अनबन की खबरें सामने आने लगीं। दरअसल, साल 2010 में संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन में बनी फिल्म गुजारिश रिलीज हुई थी। फिल्म पर सलमान ने कहा था कि कोई कुत्ता भी फिल्म को देखने नहीं गया। सलमान के इस बयान से संजय लीला भंसाली को काफी ठेस पहुंची और उनके बीच मनमुटाव हो गया।

संजय लीला भंसाली और सलमान खान ने पहली बार फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में साथ काम किया। ये फिल्म 9 अगस्त 1996 को रिलीज हुई थी।
सलमान के साथ भंसाली की फिल्म बंद हुई
संजय लीला भंसाली ने इंशाल्लाह नाम की फिल्म अनाउंस की थी, जिसमें सलमान खान और आलिया भट्ट मुख्य भूमिकाओं में थे। यह फिल्म भंसाली और सलमान की 20 साल बाद साथ में वापसी होती, लेकिन प्रोजेक्ट अचानक बंद कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान और भंसाली के बीच क्रिएटिव डिफरेंस थे। सलमान फिल्म में एक्शन और मसाला एलिमेंट्स चाहते थे, जबकि भंसाली इसे एक क्लासिक रोमांटिक फिल्म की तरह बनाना चाहते थे।
पाकिस्तानी एक्टर्स को कास्ट करना चाहते थे भंसाली
हीरामंडी भंसाली द्वारा डायरेक्ट की गई पहली वेब सीरीज है। इस सीरीज का आइडिया भंसाली के पास पिछले 18 साल से था, उस समय इस सीरीज में वो रेखा, करीना कपूर और रानी मुखर्जी को कास्ट करना चाहते थे। उसके बाद दूसरी कास्ट में उन्होंने पाकिस्तानी कलाकारों के नाम भी सोचे थे। जिसमें माहिरा खान, फवाद खान और इमरान अब्बास का नाम शामिल है। लेकिन ये भी नहीं हो सका, जिसके बाद भंसाली ने हीरामंडी द डायमंड बाजार में मनीष कोइराला, सोनाक्षी सिन्हा, ऋचा चड्ढा, अदिति राव हैदरी, शर्मिन सहगल, ताहा शाह, फरदीन खान और शेखर सुमन और उनके बेटे सुमन अहम रोल में नजर आ रहे हैं।

बतौर डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने वेब सीरीज हीरामंडी से ओटीटी में डेब्यू किया।
इन फिल्मों के चलते विवादों में रहे संजय लीला भंसाली
- पद्मावत (2018)- यह उनकी सबसे बड़ी और फेमस कॉन्ट्रोवर्सी थी। फिल्म “पद्मावत” (पहले पद्मावती नाम था) में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के संबंधों को लेकर करणी सेना और कुछ राजपूत संगठनों ने विरोध किया। आरोप था कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई और रानी पद्मावती का करैक्टर गलत तरीके से दिखाया गया। विरोध इतना बढ़ गया कि जयपुर में शूटिंग के दौरान भंसाली पर हमला किया गया, सेट तोड़ दिया गया और फिल्म की रिलीज टालनी पड़ी। बाद में, सेंसर बोर्ड ने कुछ बदलाव करवाए, नाम बदला और फिल्म रिलीज हुई।
- गोलियों की रासलीला: राम-लीला (2013)- फिल्म के टाइटल राम-लीला को लेकर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई और कहा कि यह धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। कुछ समुदायों ने फिल्म पर अश्लीलता और गलत तरीके से परंपराओं को दिखाने के आरोप लगाए। बाद में फिल्म का नाम बदलकर गोलियों की रासलीला: राम-लीला किया गया।
- बाजीराव मस्तानी (2015)- पेशवा बाजीराव और मस्तानी की लव स्टोरी पर आधारित इस फिल्म पर मराठा संगठनों और कुछ इतिहासकारों ने आपत्ति जताई। आरोप था कि फिल्म में बाजीराव की पत्नी काशीबाई (प्रियंका चोपड़ा) और मस्तानी (दीपिका पादुकोण) को गलत तरीके से दिखाया गया है। फिल्म के “पिंगा” गाने पर विवाद हुआ, जिसमें काशीबाई और मस्तानी को एक साथ डांस करते दिखाया गया।
- हीरामंडी: द डायमंड बाजार (2024)- संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज हीरामंडी काफी सुर्खियों में रही। यह सीरीज लाहौर के हीरामंडी इलाके की तवायफों के जीवन पर आधारित है। सीरीज की रिलीज के बाद डायरेक्टर पर आरोप लगा था कि उन्होंने तथ्यों के साथ छेडछाड़ की है।

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