लैब में ही उगा दिया जमीन के नीचे मिलने वाला रूबी ! ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी लेक्चरर का कमाल

लैब में ही उगा दिया जमीन के नीचे मिलने वाला रूबी ! ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी लेक्चरर का कमाल

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प्रयोगशाला में उगाई गई दुनिया की पहली रूबी: ज्वैलरी में कई तरह के स्टोन और रत्नों का इस्तेमाल किया जाता है. इनमें से एक रूबी होता है, जो काफी कीमती रत्न है. इस रत्न को कई लोग ज्योतिष से जोड़कर देखते हैं और राशि के अनुसार रत्न धारण करते हैं. रूबी धरती के अंदर हजारों सालों में पैदा होने वाला रत्न है, जिसे आर्टिफिशियली भी तैयार किया जाता है. हालांकि एक ज्वैलरी डिजाइनर ने लैब में फुल साइज रूबी तैयार करने का दावा किया है. इसकी उन्होंने प्रोसेस भी बताई है. रिसर्चर ने बताया है कि कैसे रूबी के एक छोटे से टुकड़े से फुल साइज रूबी तैयार किया जा सकता है.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट ऑफ इंग्लैंड (UWE) की लेक्चरर सोफी बून्स ने प्लैटिनम ज्वैलरी में इस्तेमाल किए जाने वाले रूबी (Ruby) को लैब में उगाने का कारनामा किया है. दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है, जब नेचुरल रूबी की तरह लैब में फुल साइज रूबी को उगाया गया है. इसके लिए एक खास तरह की केमिकल टेक्निक को डेवलप किया गया, जिसके जरिए रूबी की ग्रोथ प्रोसेस को आगे बढ़ाया गया. इस प्रोसेस में रूबी के एक छोटे से टुकड़े को केमिकल टेक्निक से मल्टीप्लाई किया गया, ताकि यह फुल साइज रूबी के तौर पर ग्रो हो सके.

यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि इस तरह की प्रोसेस पहली बार सफल हुई है, जिसमें रूबी के छोटे से टुकड़े को फुल साइज रूबी में ग्रो किया गया है. इस रूबी का इस्तेमाल प्लेटिनम ज्वैलरी में किया जा सकता है. इस रत्न को ग्रो करने के लिए सोफी ने रूबी के बेहद छोटे टुकड़े को बीज के रूप में इस्तेमाल किया. रूबी का यह टुकड़ा ज्वैलरी बनाने के दौरान रूबी को काटकर निकाले गए वेस्ट से लिया गया था. रिसर्चर ने इस टुकड़े को अंगूठी की तरह प्लैटिनम सेटिंग में रखा और फिर “फ्लक्स” नामक केमिकल एजेंट का इस्तेमाल किया. इससे तापमान कम हो जाता है, जिससे रूबी में वृद्धि होती है.

सोफी बून्स का कहना है कि वे इस रूबी को भट्टी के अंदर 5 से 50 घंटों के अंदर तैयार करने के लिए लगातार एक्सपेरिमेंट कर रही हैं. ज्यादा समय लगने से रूबी के क्रिस्टल बड़े और क्लीन हो जाते हैं. फिलहाल लैब में रूबी उगाने में कुछ दिनों का वक्त लग रहा है, जिसे कम करने की कोशिशें की जा रही हैं. लैब में डेवलप किए जा रहे रूबी सिंथेटिक नहीं हैं और इस प्रोसेस में नेचुरल फैक्टर शामिल हैं. ब्रिस्टल की रहने वाली ज्वैलरी डिजाइनर रेबेका एंडरबाई का कहना है कि लैब में उगाए जा रहे रूबी आर्टिफिशियल नहीं हैं. ये रूबी धरती में हजारों सालों में उगने वाले रूबी जेसे ही दिखते हैं.

ज्वैलरी डिजाइर की मानें तो रूबी को माइनिंग के जरिए जमीन से निकाला जाता है और इनकी कीमत बहुत ज्यादा होती है. इसके विकल्प के तौर पर सिंथेटिक रूबी बनाए जाते हैं, जिनकी अपेक्षा लैब में तैयार किए गए रूबी बेहतर हैं. ये रूबी पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर हैं. हालांकि लैब में रूबी को तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके बजाय ग्रीन एनर्जी सोर्सेज की तरफ जाना चाहिए. ब्रिस्टल विश्वविद्यालय भी इस रिसर्च में शामिल हो गई है, ताकि रिसर्च के जरिए इस तरह अन्य रत्नों को भी लैब में तैयार किया जा सके.

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