लखनऊ में प्रैक्टिस, बरेली में ससुराल और अमेठी में नौकरी, अब मैराथन में स्वर्ण पदक लाकर रचा इतिहास

लखनऊ में प्रैक्टिस, बरेली में ससुराल और अमेठी में नौकरी, अब मैराथन में स्वर्ण पदक लाकर रचा इतिहास

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एजेंसी:News18 Uttar Pradesh

आखरी अपडेट:23 जनवरी 2025, 4:57 अपराह्न IST

हर्षिता ने कर्नाटक के बंगलौर में हुई चैंपियनशिप में 10 किलोमीटर मैराथन में स्वर्ण, पांच किलोमीटर में रजत और आठ सौ मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता है.

हर्षिता शाही.

बरेली: नाथ नगरी बरेली की बेटी हर्षिता शाही ने मैराथन में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है. पांच साल पहले रेलवे ग्राउंड पर फिटनेस के लिए दौड़ शुरू करने वाली हर्षिता अब साउथ एशियन मास्टर्स ओपन की चैंपियन बन गई हैं. उनका ससुराल सावरकर नगर में है, और उनके पति धीरज अमेठी में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स कंपनी में कार्यरत हैं. उनके दो बच्चे, 5 और 11 साल के हैं. प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए हर्षिता दो महीने पहले बरेली आ जाती हैं और यहां रेलवे ग्राउंड पर कोच अजय कश्यप से प्रशिक्षण लेती हैं.

हर्षिता ने कर्नाटक के बेंगलुरु में 10 से 12 जनवरी को आयोजित चैंपियनशिप में 10 किलोमीटर मैराथन में स्वर्ण, 5 किलोमीटर में रजत और 800 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता है. कोरोना काल के दौरान वर्ष 2021 में भी उन्होंने लगातार अभ्यास किया, हालांकि किसी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया. वह लखनऊ में रहकर अभ्यास करती हैं. उन्होंने बताया कि फिट रहने के लिए शुरू की गई दौड़ प्रतियोगिता की तैयारी में बदल गई.

एक के बाद एक पदक
उन्होंने 4-5 जनवरी को हुई 33वीं यूपी मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 10 किलोमीटर मैराथन में स्वर्ण पदक जीता. 2023 में 5वीं नेशनल मास्टर्स गेम्स में 10 किलोमीटर में रजत, थर्ड खेलो मास्टर्स गेम्स दिल्ली में स्वर्ण, और 32वीं यूपी मास्टर्स में स्वर्ण पदक जीता है. 2024 में हाफ मैराथन स्मार्ट सिटी लखनऊ, 44वीं नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लगातार 6 घंटे में 48.5 किलोमीटर दौड़कर रजत पदक समेत कई प्रतियोगिताएं जीती हैं.

होती है परेशानी
हर्षिता के पति ने बताया कि लखनऊ में अभ्यास, बरेली में ससुराल और अमेठी में नौकरी के कारण कठिनाइयाँ होती हैं. बरेली में सार्वजनिक सिंथेटिक ट्रैक नहीं होने के कारण अभ्यास के लिए लखनऊ जाना पड़ा. जब बच्चे स्कूल जाते हैं, तब हर्षिता दो घंटे का अभ्यास करती हैं और शाम को भी एक सत्र करती हैं. उन्होंने बताया कि जब खेल की शुरुआत की थी, तब उन्हें ल्यूपस बीमारी थी, लेकिन नियमित अभ्यास से यह समस्या दूर हो गई.

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बरेली में ससुराल और अमेठी में नौकरी, अब मैराथन में स्वर्ण पदक लाकर रचा इतिहास

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