ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनने पर विवाद, अखाड़ों में यह पद सबसे बड़ा क्यों? जानें संन्यास की दीक्षा का मतलब

ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनने पर विवाद, अखाड़ों में यह पद सबसे बड़ा क्यों? जानें संन्यास की दीक्षा का मतलब

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आखरी अपडेट:03 फरवरी, 2025, 19:20 ist

Actress Mamta Kulkarni: 90 के दशक की अभिनेत्री ममता कुलकर्णी महाकुंभ 2025 में किन्नर अखाड़ा द्वारा महामंडलेश्वर बनीं, लेकिन विवाद के बाद पद वापस लिया गया. महामंडलेश्वर विवाद के बाद लोगों के जहन में तमाम सवाल है…और पढ़ें

किसी भी अखाड़े में महामंडलेश्वर पद इतना अहम क्यों? जानें क्या है पूरी प्रक्रिया और योग्यता.

अभिनेत्री ममता कुलकर्णी: फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी किसी परिचय की मोहताज नही हैं. 90 के दशक में उन्होंने बालीबुड में अपनी अलग पहचान कर लोगों के दिलों में खूब राज किया. प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के शुरुआत से एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी काफी चर्चा में हैं. वजह… ग्रहस्त से संयास की ओर आना. इतना ही नहीं महाकुंभ 2025 के दौरान किन्नर अखाड़ा ने इस फिल्मी सितारे को महामंडलेश्वर की पदवी दी. लेकिन, तमाम विवाद के बाद 7 दिन में उनसे यह पद वापस ले लिया गया. महामंडलेश्वर विवाद के बाद लोगों के जहन में तमाम सवाल हैं. जैसे कि, संत अखाड़ों में महामंडलेश्वर का पद सबसे बड़ा क्यों? संन्यास की दीक्षा का क्या मतलब? महामंडलेश्वर बनने के लिए क्या होनी चाहिए योग्यता? क्या है इसकी पूरी प्रक्रिया? इन सवालों को जानने के लिए News18 ने प्रतापविहार गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी से बात की. पढ़ें उनसे बातचीत के अंश-

किस अखाड़े की महामंडलेश्वर बनाई थीं ममता कुलकर्णी

ममता कुलकर्णी दो दशक से भी ज्यादा समय से देश से बाहर रह रही थीं और कई साल पहले ही फिल्मों से दूरी बना ली थी. अब जब वह वापस भारत लौटीं तो संन्यास ले लिया और महाकुंभ 2025 के दौरान महामंडलेश्वर बनाई गईं. ममता कुलकर्णी को 24 जनवरी को किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर की पदवी दी गई थी. हालांकि, कुछ विवादों के बाद उनसे यह पद वापस ले लिया गया था.

किसी भी अखाड़े में महामंडलेश्वर का पद सबसे बड़ा क्यों?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, सनातन धर्म में सबसे बड़े महंत शंकराचार्य सबसे सर्वोपरि होते हैं. शंकराचार्य के बाद महामंडलेश्वर का नंबर आता है. महामंडलेश्वर का पद साधु संतों के जो 13 अखाड़े हैं उनमें होता है. महामंडलेश्वर किसी भी अखाड़े की गतिविधियों का केंद्र होते हैं और धर्मशास्त्र के पालन को सुनिश्चित करते और कराते हैं. महामंडलेश्वर की विद्वता और व्यक्तित्व अखाड़े की पहचान को मजबूती प्रदान करते हैं. साथ ही, वे वे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी भाग लेकर भारतीय धर्म और संस्कृति का प्रचार करते हैं.

महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया क्या है?

महामंडलेश्वर पद के लिए साधु-संत का चयन होता है. इसके बाद उन्हें संन्यास की दीक्षा दी जाती है. संन्यास की दीक्षा का सीधा मतलब है कि जिन्हें महामंडलेश्वर पद के लिए चुना जाता है, उनका उन्हीं के हाथों पिंडदान कराया जाता है. उनके पितरों का पिंडदान भी इसमें शामिल होता है. इसके बाद उनकी शिखा यानी चोटी रखी जाती है. उनकी शिखा को अखाड़े में काटा जाता है. इसके बाद उन्हें दीक्षा प्रदान की जाती है. इसके बाद महामंडलेश्वर का पट्टाभिषेक किया जाता है. महामंडलेश्वर का पट्टाभिषेक दूध, घी, शहद, दही, शक्कर से बने पंचामृत से किया जाता है.

महामंडलेश्वर पद के लिए जरूरी योग्यता

किसी भी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनने के लिए शास्त्री, आचार्य होना बेहद जरूरी है. इसके बाद जिस संत का चयन होना है उसके पास वेदांत की शिक्षा भी होनी चाहिए. इसके अलावा, महामंडलेश्वर चयनित साधु का किसी मठ से सबंध होना चाहिए. साथ ही, जिस मठ से महामंडलेश्वर बनने वाले का सबंध हो वहां जनकल्याण के काम होने चाहिए.

ममता नहीं बनना चाहती थीं महामंडलेश्वर

एक इंटरव्यू में ममता कुलकर्णी अपने साध्वी बनने के सफर के बारे में कहती हैं कि मैंने पिछले 23 साल से एक भी एडल्ट फिल्में नहीं देखी हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वो कभी महामंडलेश्वर नहीं बनना चाहती थीं, लेकिन किन्नर अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के दबाव में आकर उन्होंने महामंडलेश्वर बनने के लिए हामी भरी.

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गला घोंटना

ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनने पर विवाद, अखाड़ों में यह पद सबसे बड़ा क्यों

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