फ्ली मार्केट में क्यों बिकता है सस्ता सामान? फास्ट फैशन ने इसे कैसे बनाया पॉपुलर?

फ्ली मार्केट में क्यों बिकता है सस्ता सामान? फास्ट फैशन ने इसे कैसे बनाया पॉपुलर?

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दिसंबर शॉपिंग का महीना कहलाता है. ब्लैक फ्राइडे आते ही दुनियाभर में क्रिसमस की तैयारी शुरू हो जाती है. मॉल में जहां भारी-भरकम डिस्काउंट मिलने शुरू हो जाते हैं, वहीं सड़कों पर फ्ली मार्केट सज जाती हैं. फ्ली मार्केट एक तरह की स्ट्रीट मार्केट होती है जहां लोगों को अपनी जरूरत की हर चीज सस्ते दामों पर मिल जाती है. इसमें कपड़ों से लेकर घर का हर छोटा-बड़ा सामान शामिल होता है. फ्ली मार्केट फिक्स नहीं होती, यह अचानक कभी भी गायब हो सकती है लेकिन फिर भी लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं.

पिस्सू पर पड़ा बाजार का नाम
फ्ली मार्केट को फ्लाई मार्केट भी कहा जाता है. कुछ लोग मानते हैं कि 1800 में न्यूयॉर्क में सबसे पहले फ्ली मार्केट लगाई गई. वहीं कुछ का मानना है कि इसी शुरुआत पेरिस से हुई. 1998 में मशहूर बुक राइटर एल्बर्ट लाफार्ज का ‘वॉट इज फ्ली मार्केट’ नाम से लेख छपा. इसमें उन्होंने लिखा कि इंग्लिश का शब्द फ्ली मार्केट फ्रेंच शब्द marché aux puces का पर्याय है. पेरिस में बाहर सड़कों पर बाजार लगता था जिसका नाम खून चूसने वाले पिस्सू (Siphonaptera) के नाम पर पड़ा. इंग्लिश में पिस्सू को फ्ली कहते हैं. इस बाजार में पुराना फर्नीचर बेचा जाता था. वहीं, ‘फ्ली मार्केट’ नाम से यूरोप के चार्टवेल बुक्स पब्लिकेशन ने एक किताब छापी. इसमें दावा किया गया कि सम्राट नेपोलियन III के जमाने में आर्किटेक्ट हॉसमैन  ने प्लान बनाया कि पेरिस के केंद्र में बने घरों को तोड़कर सड़क को चौड़ा किया जाएगा ताकि सेना की टुकड़ियों को मार्च के लिए ज्यादा मिले. इस योजना ने सेकंड हैंड सामान बेचने वाले व्यापारियों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया लेकिन उन्हें उत्तरी पेरिस में बने पोर्टे डी क्लिगनकोर्ट किले के गेट के बाहर स्टॉल लगाने की इजाजत दे दी गई. 1860 में यहां पहली बार सड़क पर स्टॉल लगाए गए और इसे marché aux puces यानी फ्ली मार्केट नाम दिया गया.

सामान की कंडीशन देखकर उसकी कीमत पर मोलभाव करें (Image-Canva)

सेकंड हैंड चीजों की भरमार
फ्ली मार्केट में सेकंड हैंड कपड़े, किताबें, फर्नीचर, बर्तन, इलेक्ट्रिक गैजेट और साजों-सज्जा का सामान मिल जाता है. स्टैटिस्टा के अनुसार अमेरिका में सबसे ज्यादा लोग सेकंड हैंड आइटम खरीदते हैं जिसमें सबसे ज्यादा कपड़ों की बिक्री होती है. वहीं, पश्चिमी देशों का सेकंड हैंड सामान अफ्रीका और एशिया में बेचा जाता है. इसकी शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुई. लड़ाई के कारण लोग कपड़ों पर पैसा ज्यादा खर्च नहीं करते थे. सेकंड हैंड चीजों की ब्रिकी बढ़ी तो उत्तरी अमेरिका फ्ली मार्केट का हब बन गया. फ्ली मार्केट की सस्ती चीजें हर किसी को लुभाने लगीं. भारत की बात करें तो गोवा की अंजुना मार्केट, मुंबई का कोलाबा और भिंडी बाजार, जयपुर का जौहरी बाजार और दिल्ली की सरोजिनी नगर मार्केट फ्ली मार्केट ही हैं. लेकिन क्रिसमस पर यह बाजार अधिकतर सड़कों या चौराहों पर सज जाता है.

फास्ट फैशन ने बनाया पॉपुलर
फैशन एक समय के बाद बदलता जरूर है. लेकिन अब यह बहुत तेजी से लगातार बदल रहा है. इसे फास्ट फैशन कहते हैं, जो कुछ दिन बाद ही गायब हो जाता है. फास्ट फैशन का ट्रेंड बढ़ने से फ्ली मार्केट में भी फैशन बदल जाता है. लड़कियां सबसे ज्यादा इन बाजारों से शॉपिंग करती है ताकि वह कम पैसों में स्टाइलिश, फैशनेबल और ट्रेंडी दिख सकें. यहां हर कलर, साइज और कपड़ों की खूब वैरायटी होती है लेकिन बस ढूंढने के लिए समय चाहिए. ज्यादातर कॉलेज जाने वाले लड़कियां फ्ली मार्केट से ही शॉपिंग करती हैं.

फ्ली मार्केट में शॉपिंग करते हुए सामान की अच्छे से जांच कर लेनी चाहिए (Image-Canva)

एंटीक चीजों की भी भरमार
पुराना सामान बहुत एंटीक और यूनीक होता है. इनकी कीमत लाखों रुपए में होती है, लेकिन फ्ली मार्केट में यह सामान भी बहुत सस्ते में मिलता है. दरअसल फ्ली मार्केट में केवल सेकंड हैंड सामान ही नहीं बल्कि चोरी का सामान भी बेचा जाता है. जो विंटेज पियानो महंगे शोरूम लाखों में मिलता है, वह फ्ली मार्केट हजारों रुपए या उससे कम में भी मिल जाएगा. कोई एंटीक जो आपको ढूंढने से भी नहीं मिलेगा, वह फ्ली मार्केट में दिख जाएंगे. क्रिसमस और न्यू ईयर ऐसा मौका होता है,जब लोग अपने घर को खूब सजाते हैं. ऐसे में इन चीजों की खूब बिक्री होती है.

खुल कर होता मोल भाव
मॉल में डिस्काउंट मिलते हैं तो फ्ली मार्केट में खुलकर बार्गेनिंग होती है. यहां किसी भी चीज का दाम फिक्स नहीं होता है. लोग उनका खुलकर मोलभाव कर सकते हैं. जब चीजों पर बार्गेनिंग की जाए और वह सस्ते दाम पर मिल जाए तो अलग ही खुशी मिलती है. हालांकि फ्ली मार्केट में शॉपिंग करने के लिए कुछ टिप्स को फॉलो करना पड़ता है ताकि अच्छे से बार्गेनिंग हो. इन बाजारों में हमेशा सुबह के समय या वीकडेज पर जाएं. इस समय भीड़भाड़ नहीं होती इसलिए दुकानदार बोनी करने के लिए सस्ते दाम पर भी सामान बेचने को तैयार हो जाते हैं.

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