दौसा में बाल मेला, मनोरंजन, मस्ती और ग्रामीण संस्कृति की अनोखी झलक

दौसा में बाल मेला, मनोरंजन, मस्ती और ग्रामीण संस्कृति की अनोखी झलक

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एजेंसी:न्यूज18 राजस्थान

आखरी अपडेट:27 जनवरी, 2025, 08:47 IST

Dausa News: दौसा शहर के आदर्श विद्या मंदिर में आज बाल मेले का आयोजन किया किय. इस बाल मेले का उद्घाटन डीएसपी रवि प्रकाश शर्मा ने किया. इस बाल मेले में कला एवं वस्तु संग्रहालय, चित्र पुस्तकालय, चिड़ियाघर आदि का छ…और पढ़ें

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दौसा जिले में छाछ बनाती हुई

एक ऐसे मेले मेंमनोरंजन है, मस्ती है, क्रिएटिविटी है, ग्रामीण परिवेश की झलक है साथ ही बच्चों को खेल-खेल में बहुत कुछ सिखानें किसी के कला व सीख है. यह मेला था दौसा के आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित किया गया. बच्चे अब अधिकतर नई-नई तकनीकी शिकायत नजर आ रहे हैं लेकिन ग्रामीण परिवेश को छोड़ने भी नजर आ रहे हैं उसी का एक उदाहरण यह दिया गया है जिसके चलते ग्रामीण परिवेश की झलकियां दिखाई गई है.

दौसा शहर के आदर्श विद्या मंदिर में आज बाल मेले का आयोजन किया किय. इस बाल मेले का उद्घाटन डीएसपी रवि प्रकाश शर्मा ने किया. इस बाल मेले में कला एवं वस्तु संग्रहालय, चित्र पुस्तकालय, चिड़ियाघर आदि का छोटे-छोटे बच्चों ने प्रदर्शन किया. इस मेले को लेकर बच्चों में उत्साह भी दिखाई दिया तो शिक्षक भी कार्य करते दिखाई दिए जहां शिक्षक बच्चों को सीख देते हुए देखे गए.

यह झलकियां देखने को मिली
इस बाल मेले में स्कूल के बच्चे शिक्षक, दर्जी, कुम्हार, खाती आदि पेशों का भी प्रदर्शन करते हुए नजर आए इस बाल मेले में ग्रामीण परिवेश का परिवार भी आकर्षण का केंद्र रहा जहां परिवार के पुरुष सदस्य ग्रामीण अंदाज में आगंतुकों का स्वागत करते हुए नजर आए वही घर की महिलाएं चूल्हे पर खाना बनाती हुई, चाकी पिसती हुई, सिलबट्टे पर चटनी बनाती हुई और छाछ करती हुई नजर आई. जिसमें घर में किस प्रकार सामान का रखरखाव रहता है. घर में परिवार के सदस्य किस प्रकार रहते हैं, इन सभी का छोटे-छोटे बच्चों ने बखूबी प्रस्तुत किया.

बच्चों ने लगे स्टाल
इस बाल मेले में बच्चों ने विभिन्न प्रकार की स्टाल भी लगे ताकि बच्चे अपने उत्पादों को बेचना सीखे ताकि सामान्य जीवन में बच्चे लेनदेन की प्रक्रिया को भी जान सके. इस बाल बच्चो के खेलने के लिए झूले चकरी लगाई गई थी. इस मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, छोटे-छोटे बच्चों ने फिल्मी और राजस्थानी गीतों पर अपनी प्रस्तुतियां दी. कुल मिलाकर दौसाके आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित किए गए। इस बाल मेले का स्कूली बच्चों ने जमकर लुत्फ़ उठाया और खूब एंजॉय किया साथ ही खेल-खेल में अनेक शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लिया और बहुत कुछ सीखा और समझा.

खेल-खेल में बहुत कुछ सीखने को मिला
बच्चों को खेल खेल के साथ में ही बहुत कुछ सीखने को मिला है बच्चों के द्वारा जो ग्रामीण परिवेश देखा गया जिसमें आजकल छाछ करने की ग्रामीण परिवेश में परंपरा से खत्म हो गई है आजकल तकनीकी युग आ गया है तो मोटर के माध्यम से छाछ की जाती है और चाकी से आटा पीसते हुए भी अब ग्रामीण परिवेश में महिलाएं कम दिखाई देती है आजकल चक्की से आटा पीस जाता है सहित अनेक ऐसे कार्य देखे गए जो ग्रामीण परिवेश में अब बंद से होते जा रहे हैं लेकिन उन्हें जीवित रखने के लिए बच्चों ने एक नई अलक जगाईं और यह शिक्षक हो प्रेरणा देता है.

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