जूली बोले-किरोड़ीलाल मीणा के साथ गलत कर रही सरकार: नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मंत्री विधानसभा में मनमर्जी करें, ये बर्दाश्त नहीं, हम बेइज्जती नहीं करवाएंगे – Rajasthan News

जूली बोले-किरोड़ीलाल मीणा के साथ गलत कर रही सरकार:  नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मंत्री विधानसभा में मनमर्जी करें, ये बर्दाश्त नहीं, हम बेइज्जती नहीं करवाएंगे – Rajasthan News

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विधानसभा के बजट सत्र से पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भास्कर से विशेष बातचीत में ये बात कही। जूली ने कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के मुद्दे पर कहा कि सरकार गलत कर रही है।

खुद को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बताते हैं और अपने पार्टी के इतने सीनियर नेता और मंत्री की बात नहीं सुन सकते। सरकार पूरी तरह घिरी हुई है।

मंत्रियों की परफॉर्मेंस का रिकॉर्ड तो भास्कर सर्वे में सामने आ ही चुका है। मंत्री भास्कर के सर्वे से ही अपने अंदर झांक करके देख लें।

पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

भास्कर : उपचुनावों में हारने के बाद बजट सत्र में सरकार को घेर पाएंगे?

टीकाराम जूली : सरकार तो पूरी तरह घिरी हुई है। उपचुनाव वाला मुद्दा निकल गया। उससे पहले तो बीजेपी लोकसभा हार चुकी है। पिछले सत्र में हमने जो भी मुद्दे उठाए, उस पर इन्होंने यही आड़ ली कि पिछली बार कांग्रेस की सरकार थी।

इन लोगों को पूरा एक साल हो गया, उसका जवाब तो इन्हें देना पड़ेगा। इनका पूरा फोकस कांग्रेस शासन की योजनाओं का नाम बदलने, बंद करने या कमजोर करने पर ही सीमित रहा।

सरकार सबमें फेल साबित हुई। गर्मी आई तो बिजली नहीं थी, बरसात आई तो पानी का निकासी का साधन नहीं था। किसान को जरूरत पड़ी तो खाद नहीं थी।

दीपावली आई। हिंदुओं का इतना बड़ा त्योहार है। ये लोग हिंदुओं की बात तो करते हैं, लेकिन गरीब लोगों को समय पर पेंशन तक नहीं दे पाए।

बेरोजगारी भत्ता तक नहीं दे रहे हैं। बच्चे स्कॉलरशिप में हैं। मंत्रियों की बयानबाजी के अलावा कुछ नजर नहीं आता है।

भास्कर : पेपरलीक करने वालों पर कार्रवाई हुई है। पेपरलीक कांग्रेस सरकार की कमजोर कड़ी रहा। क्या यह मुद्दा आपकी पार्टी को बैकफुट पर नहीं लाता?

जूली : यह अलग बात है कि पेपरलीक मुद्दे को भाजपा ने भुनाया। हमसे ज्यादा पेपरलीक तो भाजपा शासन में हुए। उनमें तो कोर्ट के आदेश के बाद जांच करवानी पड़ी जबकि हमारे समय में हमारी सरकार ने जांच की।

जहां बीजेपी की सरकारें हैं, वहां पेपरलीक नहीं हो रहे क्या? भारत सरकार कीृ अनेकों भर्ती परीक्षाओं के पेपरलीक हुए। कहां पर पर लीक नहीं हुए, सब जगह पेपर लीक थे।

पूरे देश में सबसे पहले पेपरलीक पर कानून बना तो राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने बनाया था। इसमें 10 साल की सजा और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान रखा।

भारत सरकार ने उसके बाद पेपरलीक पर कानून बनाया है। इसका मतलब पेपरलीक पूरे देश की समस्या थी, तभी भारत सरकार ने कानून बनाया। भारत सरकार के कानून में 10 साल की सजा और 10 लाख का जुर्माना ही है।

इस सरकार में देख लीजिए, पहले बीज निगम का पेपर लीक हो गया। अब आरयूएचएस में नर्सिंग का पेपरलीक हो गया और उसको यह दबाना चाह रहे थे 48 घंटे तक सूचना को दबाए रखा और फिर किया।

इन्हें प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए कि हमने आपको भ्रमित किया। पेपरलीक पर कार्रवाई की बात कर रहे हो तो सामने बताएं।

इस साल मार्च में एसआई भर्ती में घोटाले को लेकर जानकारियां सामने आने लगी थीं। फोटो- जब ट्रेनी एसआई को पकड़ा गया था।

इस साल मार्च में एसआई भर्ती में घोटाले को लेकर जानकारियां सामने आने लगी थीं। फोटो- जब ट्रेनी एसआई को पकड़ा गया था।

भास्कर : एसआई भर्ती आपके वक्त हुईं, उसमें फर्जीवाड़ा तो हुआ है आप यह तो मानते हैं? अब एसआई भर्ती के मुद्दे पर आपका क्या स्टैंड है?

जूली : इस सरकार ने एसआई भर्ती परीक्षा को ड्रामा बना दिया। कैबिनेट मंत्री, कैबिनेट सब कमेटी, एसआईटी, एजी, पुलिस सब कह रहे हैं एसआई भर्ती निरस्त होनी चाहिए।

वहीं, सरकार कोर्ट में जवाब पेश कर रही है कि भर्ती निरस्त नहीं होनी चाहिए। एक तरफ तो कह रहे हो कि हम पेपर लीक करने वाले चोरों पर कार्रवाई करेंगे। दूसरी तरफ आप अपना स्टैंड फाइनल नहीं कर पा रहे हो। जिन लोगों को अरेस्ट कर रहे हो। उन्हें कोर्ट से बेल मिल रही है।

वापस ड्यूटी भी जॉइन करवा रहे हो। बताइए, आपने किस बिहाफ पर उन्हें अरेस्ट किया? क्या आरोप लगाए और किस बिहाफ पर कोर्ट ने उनको जमानत दे दी। वापस ट्रेनिंग करने लग गए। इस पर भी तो जवाब दीजिए।

भास्कर : आपकी पार्टी के विधायक मुकेश भाकर छह महीने के लिए अगस्त से सस्पेंड चल रहे हैं, इस मुद्दे पर बना गतिरोध खत्म होगा या नहीं?

जूली : हमारी बात हुई थी, उन्हें तो अंदर लेना ही पड़ेगा। विधानसभा से एक बार निकालने के बाद वापस लेने का फैसला भी अंदर होता है। जैसे ही सत्र शुरू होगा हम अपनी बात रखेंगे और बहाल करवाएंगे।

वो कोई इतना बड़ा मुद्दा नहीं था, जिसमें मुकेश भाकर को इतना बड़ा पनिशमेंट दिया। सरकार सत्ता के मद में है। सदन के अंदर बहुमत है, तो भाकर को सस्पेंड करने का प्रस्ताव पारित करवा दिया। इस तरह होता रहा तो विपक्ष बात ही नहीं रख पाएगा।

स्पीकर वासुदेव देवनानी ने निलंबित विधायक मुकेश भाकर को बाहर भेजने को कहा था। -फाइल फोटो।

स्पीकर वासुदेव देवनानी ने निलंबित विधायक मुकेश भाकर को बाहर भेजने को कहा था। -फाइल फोटो।

भास्कर : इंडिया गठबंधन बिखरता हुआ दिख रहा है। सहयोगी हनुमान बेनीवाल कह रहे हैं कांग्रेस तो बीजेपी से मिली हुई है?

जूली : जो भी बातें हैं, समय आने पर सब क्लियर करेंगे। लोकसभा चुनाव में साथ लड़े थे, अब अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से हाईकमान फैसला करता है। कई बातें राष्ट्रीय नेतृत्व को देखनी हैं। उसके आधार पर राजस्थान का फैसला होगा।

भास्कर : विधानसभा के बजट सत्र में क्या आपको पार्टी के बड़े नेताओं का साथ मिलेगा? धड़ेबंदी का कितना असर दिखेगा?

जूली : सब साथ हैं, कोई छोटा बड़ा नहीं है। पिछला सेशन ऐतिहासिक रहा। इस बार भी हम सब लोग मिलकर सरकार को घेरेंगे। सब लोग कांग्रेस के आलाकमान के निर्देश के हिसाब से काम कर रहे हैं।

सबने अच्छी परफॉर्मेंस दिखाई। हमारे जो विधायक पहली बार जीत कर आए हैं, उन्होंने बहुत अच्छी परफॉर्मेंस दिखाई थी। इस सत्र में भी एकजुट हैं। धड़ेबंदी हमारे यहां नहीं, बीजेपी में है।

भास्कर : पिछले बजट सत्र में विपक्ष और स्पीकर के बीच भी कई बार तनातनी हुई। आपने खुद सवाल उठाए, इस बार क्या रुख रहेगा?

जूली : सदन चलाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। विपक्ष से ज्यादा जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की रहती है कि वह सदन को सुचारू रूप से चलाएं। राजस्थान की जनता की गाढ़ी कमाई विधानसभा पर लग रही है। मैं नहीं चाहता वह बेकार जाए।

जनता ने हमें हंगामा या हुड़दंग करने नहीं, बल्कि मुद्दे उठाने के लिए चुनकर भेजा है। दिक्कत यह है कि सरकार के मंत्री सवालों और मुद्दों का गलत जवाब देते हैं। कई बार जवाब नहीं देते हैं। भ्रमित करते हैं।

ऐसी स्थिति में स्पीकर को टाइट होना पड़ेगा। सवालों के जवाब आने चाहिए और सही आने चाहिए। मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं। इसका मतलब राजस्थान की जनता को गुमराह कर रहे हैं।

पिछली बार नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया था कि जब वे सदन में बोल रहे थे तो कई बार माइक बंद कर दिया गया था। -फाइल फोटो।

पिछली बार नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया था कि जब वे सदन में बोल रहे थे तो कई बार माइक बंद कर दिया गया था। -फाइल फोटो।

भास्कर : क्या गारंटी है इस बार विपक्ष हंगामा नहीं करेगा? क्योंकि हंगामे में बड़ी भूमिका विपक्ष की रहती है। बिना हंगामे भी तो मुद्दों से सरकार को घेरा जा सकता है?

जूली : विधानसभा सत्र में पहली बार यह देखा है कि जो काम विपक्ष के लोगों को करना चाहिए, वह सत्ता पक्ष के मंत्री कर रहे हैं। मंत्रियों को यह पता ही नहीं है कि उनकी खुद की क्या हैसियत है?

क्या परंपराएं हैं? क्या उनकी जिम्मेदारी है? मंत्रियों को कब बोलना चाहिए, कब नहीं बोलना चाहिए, उन्हें यही एहसास नहीं है। विधानसभा चलने की जिम्मेदारी अध्यक्ष-सभापति की है।

वो ऊपर से डायरेक्शन देते हैं। पिछली बार जब हम सरकार में थे तो सीपी जोशी स्पीकर थे। वे मंत्रियों तक को बीच में बोलने पर डांटते थे। सख्ती से नियमों की पालना करवाते थे।

हम तो सदन चलना चाहते हैं, जवाब तो सरकार देगी। अब यह थोड़े ही संभव है कि मंत्री और सत्ता पक्ष के विधायक जो मर्जी, वह करेंगे। हमने सदन चलाने का वादा कर लिया तो यह जो मर्जी आए वह करेंगे और हम चुपचाप रहेंगे ऐसा नहीं हो सकता।

हम सहयोग कर सकते हैं। बेइज्जती नहीं करवाएंगे। सरकार बहुमत के मद में है। उसका लाभ उठाकर जिस तरह मुकेश भाकर को निलंबित किया, ऐसी चीजें बर्दाश्त नहीं होंगी।

भास्कर : कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इस बार भी असेंबली से छुट्टी मांगी है। नेता प्रतिपक्ष के नाते इस पूरे प्रकरण पर आपका क्या मत है?

जूली : उन्होंने तो बहुत पहले से छुट्टी मांग रखी है, कोई दे तब तो। खुद को विश्व की सबसे बड़ी स्वघोषित पार्टी बता रहे हैं। अपने पार्टी के इतने सीनियर नेता और मंत्री की बात नहीं सुन सकते।

क्या कारण है इनके अंदर इतना भी लोकतंत्र नहीं है कि अपने नेता की बात सुन ले। कभी वह वैराग्य की बात कर रहे हैं। कभी इस्तीफे की बात कर रहे हैं। कभी विधानसभा से छुट्टी की बात कर रहे हैं।

उनसे मुख्यमंत्री-प्रदेश अध्यक्ष को बात करनी चाहिए। प्रदेशाध्यक्ष-प्रभारी पता नहीं क्या-क्या कर रहे थे? कह रहे थे हमारी बात हो गई। इस्तीफा वापस हो जाएगा। केवल बयान देकर गायब हो जाते हैं।

विधानसभा बजट सत्र में नहीं आने को किरोड़ी की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। जब किरोड़ी ने इस्तीफा दिया था तो पत्रकारों के सवाल पर इस तरह जवाब दिया था। (फाइल फोटो)

विधानसभा बजट सत्र में नहीं आने को किरोड़ी की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। जब किरोड़ी ने इस्तीफा दिया था तो पत्रकारों के सवाल पर इस तरह जवाब दिया था। (फाइल फोटो)

भास्कर : ऐसा संभव है कि सरकार में किसी मंत्री की नहीं सुनी जाए?

जूली : सुनी किसकी जा रही है? मंत्री,विधायकों कार्यकर्ताओं की, किसी की नहीं सुनी जा रही है। डॉ. किरोड़ी तो सीनियर हैं, अनुभवी हैं, हिम्मत जुटाकर उन्होंने कह दिया।

कितने ऐसे मंत्री हैं जिनकी सुनी जा रही है? उनको सरकार में पूछ कौन रहा है? दिल्ली से जब तक पर्ची आएगी नहीं, तब तक सुनी नहीं जाएगी। गृह राज्य मंत्री तो शांत हैं। वहीं कई मंत्री तो यही सोचकर खुश है कि राज का आनंद लो।

मंत्रियों की परफॉर्मेंस का रिकॉर्ड तो अभी भास्कर ने सर्वे किया था, उस सर्वे में सार आ चुका है। सरकार के मंत्री भास्कर के सर्वे से ही अपने अंदर झांक करके देख लें।

भास्कर : डॉ किरोड़ी ने आपकी सरकार के वक्त जो मुद्दे उठाए, उन पर कार्रवाई नहीं होना भी उनकी नाराजगी की वजह बताया जा रहा है।

जूली : इतने सीनियर आदमी हैं। मुख्यमंत्री को बात करनी चाहिए। इश्यूज क्या हैं, मुद्दे क्या हैं, किन बातों को लेकर वो नाराज हैं, वह अपनी बात करें। अगर वह इस्तीफा दे रहे हैं तो उसे ढंग से इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए।

सरकार उनके साथ गलत कर रही है। ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए। मुझे बड़ा दुख हुआ जब उन्होंने कहा कि मुझे अपनों ने मारा। दौसा उपचुनाव के दौरान जो हुआ, वह भी उनकी एक पीड़ा है, उनको जरूर देखना चाहिए।

भास्कर : ईआरसीपी का नाम भगवान राम के नाम पर हो गया। एमओयू सार्वजनिक करने से मना किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताकर खारिज कर दिया, आप इसे किस रूप में देखते हैं?

जूली : हम लगातार सरकार से सवाल भी कर रहे हैं। पिछले सत्र में खुद हम लोगों ने चर्चा करवाई, लेकिन सरकार ने MOU नहीं दिखाया।

सरकार एमओयू दिखाने से डर क्यों रही है, डर किस बात का है? यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा कैसे हो गया? इसका पानी कोई पाकिस्तान ले जाएगा क्या, जो छुपा रहे हो।

एमओयू सार्वजनिक करने से आप इसलिए डरते हैं कि आपने राजस्थान के जो हित थे उनको मध्य प्रदेश के पास गिरवी रख दिया। आप घबरा रहे हैं कि पहले की योजना में जितना पानी राजस्थान को मिलना था, उससे काफी कम पानी कम आएगा।

जनता को पता लगेगा। सिंचाई की बात छोड़ दीजिए, पीने की पूर्ति हो जाए बड़ी बात है। अब आपने भगवान राम के नाम पर कर दिया। तीन बार तो नाम ही बदल दिया।

एक साल में कितना पैसा मंजूर किया है? दोनों बांधों का मोदी जी से फीता कटवा रहे हो, वो हमारी सरकार ने बनवाए थे। आपका योगदान क्या है ईआरसीपी में? उठाएंगे।

भास्कर :आपकी सरकार में सोलर पार्क के नाम पर बड़ी तादाद में जमीनें बड़े समूहों को दी गई। विधायक रविंद्र भाटी सहित कई संगठन खेजड़ी काटने व अन्य मुद्दों पर विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस का क्या स्टैंड है?

जूली : सोलर प्लांट हमारे समय में भी लगे, लेकिन मास्टर प्लान तो बनाना पड़ेगा। पूरी जमीन पर सोलर लगा देंगे तो पर्यावरण और जलवायु का क्या होगा?

आज शहरों में पानी की समस्या क्यों आ गई, क्योंकि पूरे शहर कंक्रीट के हो गए। बरसात आई, पूरा पानी बहकर बाहर चला जाता है। पानी आएगा कहां से? जो पर्यावरण का मुद्दा है उसके लिए लोग विरोध कर रहे हैंं।

चाहे विधायक कर रहे हों, चाहे खेजड़ी बचाओ अभियान के लोग विरोध कर रहे हैं, सरकार को उस पक्ष को भी सुनना तो चाहिए कि वे क्यों इस बात को रख रहे हैं?

आप लाखों करोड़ के एमओयू बता रहे हो, उसका फायदा कितना हो रहा है? लोगों को कितना फायदा हो रहा है? राजस्थान में कितना फायदा हो रहा है? इस बारे में सोचने की जरूरत है।

सोलर प्लांट के मुद्दे को लेकर करीब 2 महीने पहले विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जैसलमेर के बईया गांव में धरना स्थल पर रात गुजारी थी।

सोलर प्लांट के मुद्दे को लेकर करीब 2 महीने पहले विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जैसलमेर के बईया गांव में धरना स्थल पर रात गुजारी थी।

भास्कर : पिछली बार आप पर सरकारी जमीन आवंटन करवाने के मामले में आरोप लगे थे। सत्ता पक्ष ने ही आरोप लगाए थे, जांच की बात भी कही थी?

जूली : जिस जगह जमीन बताई वहां तो मेरा दूर दूर तक कोई संबंध ही नहीं निकला। मेरे पर जो आरोप लगाए गए थे, आसपास 200 लोग रहते हैं, उनसे बयान ले लीजिए। मैं तो जहां जमीन बताई वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला था।

अब भी आरोप लगाने वाले साबित करें कि मेरा वहां की जमीन से कोई लेना-देना है। सबूत तो दीजिए। पहली बार ऐसा हुआ है कि 20-25 विधायकों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं। हम जैसे लोगों पर मुकदमे कर दिए।

भास्कर : आपके कई नेताओं पर सरकार से हाथ मिलाने, दोस्ती निभाने के आरोप भी लगते रहे हैं। विधानसभा सत्र के दौरान दोस्ताना रिश्तों की बानगी कई बार दिखती है।

जूली : हमारे सब नेता एकजुट हैं। पिछली बार भी आपने देखा होगा, सब ने अच्छा काम किया। हम सब कांग्रेस के सिपाही हैं। हाईकमान के निर्देश पर काम कर रहे हैं।

हमारे यहां धड़ेबंदी नहीं है। धड़ेबंदी तो बीजेपी में चल रही है। वहां देखो रोज अंदर ही अंदर एक दूसरे को गिराने की चालें चली जाती हैं। फ्लोर पर भी दिख जाएगा।

………

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