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क्या आपकी जैकेट, शूज, हैंडबैग और कॉस्मेटिक्स वीगन हैं? क्यों फैशन की भेंट चढ़ते हैं जानवर?
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लंदन फैशन वीक ऐसा पहला फैशन इवेंट बन गया है, जिसमें 2025 से किसी भी एग्जॉटिक एनिमल स्किन के बने गारमेंट को शामिल नहीं किया जाएगा। यानी इस फैशन शो में सांप, मगरमच्छ जैसे जानवरों की खाल की बनी कोई भी ड्रेस या एक्सेसरी नजर नहीं आएगी। ब्रिटिश फैशन काउंसिल ने इस बैन का एलान किया है। लंदन फैशन वीक साल में 2 बार आयोजित होता है। 2025 में यह शो 20 से 24 फरवरी तक चलेगा। जानवरों की खाल, उनके बाल समेत कई चीजों का इस्तेमाल फैशन इंडस्ट्री में काफी समय से हो रहा है। अधिकतर मेकअप प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले केमिकल जानवरों के शरीर से निकाले जाते हैं।
बाल, खाल और ऊन होती इस्तेमाल
फोर पाउज वेबसाइट के मुताबिक फैशन इंडस्ट्री में कपड़े डिजाइन करने के लिए हर साल लगभग 500 करोड़ जानवरों का इस्तेमाल होता है। वहीं, PETA के अनुसार चमड़ा और फर के लिए इनमें से करोड़ों जानवरों को मार दिया जाता है। बैग, बेल्ट, वॉलेट, फुटवियर और जैकेट बनाने के लिए जानवरों की खाल का खूब इस्तेमाल होता है। लेदर भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर की खाल से बनता है। वही विंटर वियर बनाने में जानवरों के बालों से फर कोट, फर जैकेट या फर कार्डिगन बनाए जाते हैं। फर बनाने के लिए लोमड़ी, खरगोश, सील, पोलकैट जैसे जानवरों का इस्तेमाल होता है। जिन जानवरों के बाल ऊन बनाने के लिए इस्तेमाल होते हैं, उनके शरीर में भी कई जगह से खून बहता है और वह चोटिल होते हैं।
मगरमच्छ की स्किन से बनते लग्जरी आइटम
दुनिया में सबसे महंगा लेदर मगरमच्छ की स्किन से बनता है। फैशन डिजाइनर भावना जिंदल बताती हैं कि यह लेदर लग्जरी आइटम्स बनाने में इस्तेमाल होता है। इसका चमड़ा 770 रुपए 1 सेंटीमीटर के हिसाब से बिकता है। मगरमच्छ की खाल से बने हैंडबैग और शूज दुनियाभर के कई अमीर लोग के वॉर्डरोब का हिस्सा हैं। लेकिन भारत में यह लेदर बैन है। ऑस्ट्रेलिया में क्रोकोडाइल फार्मिंग केवल चमड़ा निकालने के लिए की जाती है। यहां मगरमच्छ को पालना और उन्हें मारकर खाल निकालना लीगल है।
ऑस्ट्रिच यानी शुतुरमुर्ग की त्वचा से भी चमड़ा बनाया जाता है (Image-Canva)
छिपकली और अजगर की खाल भी महंगी
फैशनेबल दिखने के लिए लोग यूनीक स्टाइलिंग को अपनाने की कोशिश करते हैं। इन फैशन लवर्स के लिए अलग-अलग लेदर मार्केट में मौजूद हैं। मगरमच्छ के अलावा छिपकली की खाल से बना चमड़ा भी बहुत महंगा बिकता है। इनका चमड़ा ग्लोसी होता है जो पार्टी वियर आउटफिट या हैंडबैग बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। अजगर की स्किन भी काफी महंगी होती है। जापान और थाईलैंड में मिलने वाली स्टिंग्रे मछली की स्किन से बना चमड़ा दुनिया में चौथा सबसे महंगा लेदर है। इसकी कीमत 1,100 रुपए प्रति स्क्वेयर फुट है।
मेकअप प्रोडक्ट्स में एनिमल से बने केमिकल
जो लिपस्टिक या आईशेडो लगाया जाता है, उसमें भी जानवरों और कीड़ों का इस्तेमाल हो रहा है। कैक्टस पर दिखने वाले लाल रंग कीड़े यानी कोचीनियल बीटल को लिपस्टिक, आईशैडो, ब्लश और नेल पॉलिश के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मछली की चर्बी में में एक प्रोटीन होता है जो स्किन का कोलेजन बढ़ाता है और एजिंग को रोकता है। इस प्रोटीन को एंटी एजिंग प्रोडक्ट्स में डाला जाता है। शार्क के लिवर से भी एंटी एजिंग क्रीम बनाई जाती है। इससे लिप बाम भी बनता है। भेड़ के बालों में एक लानौलिन नाम का केमिकल होता है, इससे भी लिप बाम, लिप ग्लॉस और मॉइश्चराइजर बनता है। मछली की खाल से एक चमकीला केमिकल निकलता जिसे गुआनिन कहते हैं। शिमरी इफेक्ट के लिए इसे हाइलाइटर, ग्लिटर मस्कारा, नेल पॉलिश और आईशेडो में डाला जाता है।
विदेशों में जानवरों पर कॉस्मेटिक्स का ट्रायल किया जाता है जिससे लाखों जानवरों की जान चली जाती है (Image-Canva)
नेवले-गिलहरी के बालों से बनते मेकअप ब्रश
मेकअप करने के लिए कई तरह के ब्रशों का इस्तेमाल होता है। यह मेकअप ब्रश गिलहरी, नेवले, बकरी, घोड़े और लोमड़ी के बालों से बनते हैं। इन्हीं जानवरों के बालों से पेंटिंग ब्रश भी बनते हैं। वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मुताबिक साल 2002 में भारत में नेवलों से 1 हजार किलोग्राम बाल निकाले गए। भारत में हर साल बालों की वजह से 1 लाख से ज्यादा नेवले मार दिए जाते हैं।
वीगन फैशन को बढ़ावा
जब से सस्टेनेबल फैशन की बात होने लगती है, तब से कई फैशन डिजाइनर वीगन फैशन को अपनाने लगे हैं। PETA के अनुसार वीगन फैशन में जानवरों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं। यह अर्थ फ्रेंडली फैशन है। 21वीं सदी में इसका दौर शुरू हुआ। वीगन फैशन के तहत कॉटन, बांस, केला, जूट, अलसी और भांग के पेड़ से कपड़े बनाए जा रहे हैं। बैंबू फाइबर कॉटन जैसा लगता है जबकि हेम्प यानी भांग से बना फैब्रिक लिनन, जूट जैसा लगता है।
प्लांट बेस्ड कॉस्मेटिक्स
जहां जानवरों से मेकअप प्रोडक्ट बन रहे हैं, वहीं ऐसी भी कुछ कंपनी हैं जो प्लांट बेस्ड यानी वीगन मेकअप की तरफ कदम बढ़ा रही हैं। इन प्रोडक्ट्स में किसी तरह का कोई केमिकल नहीं मिलाया जाता। यह पौधों से बने तेल, फूल और पत्तों से बनाए जाते हैं। इन नैचुरल मेकअप प्रोडक्ट्स से स्किन को भी नुकसान नहीं पहुंचता।
टैग: पशु क्रूरता, पशु पालन, पशु कल्याण, कोबरा साँप, मगरमच्छ बचाव, यूरोपीय संघ, नये फैशन, जंगली जानवर
पहले प्रकाशित : 4 दिसंबर, 2024, दोपहर 1:26 बजे IST
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