कोल्‍ड्र‍िंक की बोतल का तला क्‍यों नहीं होता फ्लैट? गट-गट कर पी तो ली, पर कभी सोचा है इसका कारण…

कोल्‍ड्र‍िंक की बोतल का तला क्‍यों नहीं होता फ्लैट? गट-गट कर पी तो ली, पर कभी सोचा है इसका कारण…

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कोल्ड ड्रिंक की प्लास्टिक बोतल नीचे से चपटी क्यों नहीं होती: हमारे आसपास कई ऐसी चीजें होती हैं, ज‍िन्‍हें हम द‍िन-रात देखते हैं. लेकिन वो ऐसी क्‍यों हैं, जब ये सवाल पूछा जाता है तो अक्‍सर हमें एहसास होता है कि ‘अरे, इस बारे में तो हमने सोचा ही नहीं.’ ऐसी ही एक चीज है, कोल्‍ड्र‍िंक्‍स की बोतलें. आप चाहें क‍िसी मॉल में शॉपिंग करने जाएं या ग्रॉसरी स्‍टोर, में कोल्‍ड्र‍िंक्‍स की बोतलें तो आपने खूब देखी होंगी. लेकिन क्‍या आपने कभी इस बात पर गौर क‍िया है कि आखिर इन बोतलों का तला यानी बॉटम कभी सपाट क्‍यों नहीं होता? हमेशा Cold Drink की प्‍लास्‍ट‍िकी क बोतलों का तला स्‍पाइक के स्‍टाइल का होता है. जबकि वहीं अगर आप क‍िसी पानी की बोतल खरीदते हैं, तो उसका तला हमेशा सपाट ही होता है. तो आखिर प्‍लास्‍ट‍िक की कोल्‍ड्र‍िंक्‍स की बोतलों का ये अंदाज क्‍यों है…? क्‍या से सि‍र्फ स्‍टाइल है या इसके पीछे व‍िज्ञान है…? आइए आपको बताते हैं.

क्‍या है कोल्‍ड्र‍िंक्‍स की द‍िलचस्‍प कहानी
शरीर को ठंडा करने के लि‍ए छाछ और नींबू पानी जैसे पेय पदार्थ तो सद‍ियों से लोग पीते आ रहे हैं. लेकिन Cold Drinks का इतिहास 17वीं शताब्दी में शुरू होता है. नींबू का रस, पानी और शहद से बनी पहली लेमोनेड सबसे पहली मार्केटेड सॉफ्ट ड्रिंक थी. 1676 में, पेरिस में कंपनी डी लिमोनाडियर्स को लेमोनेड बेचने के लिए एकाधिकार प्राप्त हुआ था. 17वीं शताब्दी में, यूरोपीय लोगों ने प्राकृतिक रूप से कार्बोनेटेड स्प्रिंग वाटर की नकल करने का प्रयास किया. 1780 में, जेनेवा में जोहान जैकब श्वेप्पे ने पानी को मैनुअल रूप से कार्बोनेट करने की प्रक्रिया विकसित की.

Cold Drinks का इतिहास 17वीं शताब्दी में शुरू होता है.

क्‍यों सपाट नहीं होता कोल्‍ड्र‍िंक्‍स की बोलत का तला?
कोल्ड्रिंक की बोतल का अनोखा आकार और ड‍िजाइन उसकी ब्रांड पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. लेकिन जब ड‍िजाइन की बात करें तो से स्‍पाइक स्‍टाइल का बॉटम स‍िर्फ स्‍टाइल ही नहीं बल्‍कि इसके पीछे ड‍िजाइन साइंस है. दरअसल इसके पीछे की वजह है कोल्‍ड्र‍िंक्‍स की गैस. असल में कार्बोनेटेड पेय यानी कोल्ड्रिंक में दबाव होता है, जो फ्लैट तल वाली बोतलों पर अधिक दबाव डाल सकता है. ऐसे ड‍िजाइन की असली वजह होती है कि जब सॉफ्ट ड्रिंक को ठंडा क‍िया जाता है तो उसके वॉल्‍यूम में बदलाव होता है. क्‍योंकि इनमें गैस होती है तो इस तरह के ड‍िजाइन से बोतल वॉल्‍यूम बढ़ने पर एडजस्‍ट हो जाती है और प्रेशर कंट्रोल हो जाता है. इसके साथ ही इन बोतलों के नीचे वाले ह‍िस्‍से को ऊपर वाले ह‍िस्‍से से ज्‍यादा टाइट भी बनाया जाता है. इससे बोतल आसानी से प्रेशर झेल पाती है.

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