करण जौहर को ये कौन सी बीमारी हो गई कि इस तरह लगने लगे हैं पिलपिले, खुद बताई आपबीती, लेकिन कैसे होता है इसका इलाज

करण जौहर को ये कौन सी बीमारी हो गई कि इस तरह लगने लगे हैं पिलपिले, खुद बताई आपबीती, लेकिन कैसे होता है इसका इलाज

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आखरी अपडेट:18 फरवरी, 2025, 11:32 IST

Karan Johar Body Dysmorphia: मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक करण जौहर अपने बॉडी को लेकर बेहद भावुक हैं. उन्हें खराब बॉडी से संबंधित एक बीमारी हो गई है जिसे लेकर वे खुद परेशान हैं. आखिर क्या होती है यह बीमारी, इसक…और पढ़ें

करण जौहर. Instagram

करण जौहर बॉडी डिस्मोर्फिया: अगर आपने करण जौहर का हालिया कोई वीडियो देखा होगा तो आपने जरूर देखा होगा कि करण जौहर की बॉडी किस तरह पिलपिली हो गई है. हालांकि किसी की बॉडी को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए लेकिन करण जौहर ने खुद बताया है कि उन्हें बॉडी डिसमॉर्फिया नाम की बीमारी हो गई है. यह एक मानसिक बीमारी है जिसमें इंसान अपने शरीर को लेकर बहुत बुरा सोचता है और इससे गिल्ट फील करता है. इस बीमारी में मरीज का ध्यान अक्सर अपने शरीर पर ही रहता है और उसे लगता है कि मेरा शरीर बहुत खराब है. बॉडी डिसमॉर्फिक डिसॉर्डर आमतौर पर टीनएज बच्चों में होता है लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है.

करण जौहर ने क्या कहा
करण जौहर ने कहा, मुझे बॉडी डिसमॉर्फिया है. जब मैं पूल में जाता हूं तो यह बहुत अजीब लगता है. मुझे नहीं पता कि बिना खराब महसूस किए पूल में कैसे जाऊं. मैं इस विचार से उबरने के लिए बहुत कोशिशें की हैं. अपने दिमाग को बहुत समझाया लेकिन इससे उबर नहीं पा रहा हूं. बेशक मैंने वजन भी कम कर लिया है पर लोगों को इसे दिखाने में बहुत परेशानी होती है. यही कारण है कि मैं किसी को अपना बदन नहीं दिखाना चाहते. इसलिए मैं अपने साइज से बहुत बड़ा कपड़ा पहनता हूं.मैं अपने आप को समझा नहीं पाता कि मेरी बॉडी सही है.

बॉडी डिसमॉर्फिया के लक्षण
ब्रिटिश हेल्थ सर्विस एनएचएस के मुताबिक अगर किसी को बॉडी डिसमॉर्फिया हो जाए तो वह अपने शरीर के किसी खास हिस्से को लेकर हमेशा चिंतित रहता है. वे ज्यादातर समय अपने शरीर की तुलना किसी दूसरे से करते रहता है. वे दिन में कई बार खुद को आइने में देखते रहता है. वे सैकड़ों बार बालों को कंघी से संवारता है, सैकड़ों बार चेहरे को साफ करता है, कई-कई बार मेक-अप करता है, कई-कई बार कपड़े बदलते रहता है. स्किन में तरह-तरह के प्रयोग करता है. यह बहुत ही गंभीर समस्या है. इसमें वह दूसरों की बात नहीं समझता और अपने मन में यह पाल लेता है कि उसके शरीर में बहुत बड़ी परेशानी है.

कैसे होता है इसका इलाज
सबसे पहले तो अगर किसी के साथ इस तरह की चीजें महसूस होती है तो उसे डॉक्टर के पास जाना चाहिए. इसका बहुत अच्छा इलाज है. इसमें थेरेपी दी जाती है इसे कॉगनिटिव विहेवियर थेरेपी (CBT) दी जाती है. इसमें डॉक्टर मरीज को समझाता है. इसके लिए कुछ एंटीडिप्रीसेंट दवाइयां भी है जो डॉक्टर मरीज के लक्षण को देखकर देते हैं. इस बीमारी में मरीज की जो सोच उसे बदलने की कोशिश की जाती है.

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