[ad_1] अयोध्या: कबीरदास कहते हैं कि तुम जैसा भोजन करोगे, वैसा मन ही रखोगे. मन एवं भोजन का साम्य अद्भुत है, ठीक इसी प्रकार तुम जैसा जल पियोगे तुम्हारी वाणी भी वैसी ही होगी अर्थात शुद्ध-सात्विक आहार तथा पवित्र जल से मन और वाणी पवित्र होते हैं कहने का तात्पर्य है कि जो जैसी संगति