[ad_1] एक समय था जब ‘कठपुतली’ शब्द से मन में खिलौने जैसे पौराणिक पात्रों की छवि उभरती थी, जिन्हें कठपुतली चलाने वाले पर्दे के पीछे या बक्से के ऊपर से नियंत्रित करते थे। यह समकालीन कठपुतलियों के मामले में सच नहीं है। ये (कभी-कभी, जीवन से भी बड़ी) कठपुतलियाँ मंच पर रहना पसंद करती हैं।