Shivaji Maharaj को समर्पित…30 सालों से ढोल बजाने वाले महबूबजी कौन हैं?

Shivaji Maharaj को समर्पित…30 सालों से ढोल बजाने वाले महबूबजी कौन हैं?

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एजेंसी:Local18

आखरी अपडेट:18 फरवरी, 2025, 20:21 IST

Chhatrapati Shivaji Maharaj: महबूब इमाम हुसैन मदुनवर पिछले 30 वर्षों से गेटवे ऑफ इंडिया पर ढोल बजाकर छत्रपति शिवाजी महाराज को सम्मान दे रहे हैं. धर्म से ऊपर उठकर वे शिवाजी की विरासत और सामाजिक एकता का संदेश फैल…और पढ़ें

गेटवे ऑफ इंडिया पर 30 साल से शिवाजी को सम्मान दे रहे हैं ये शख्स

छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम सुनते ही वीरता और स्वराज्य की छवि दिमाग में आती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका शासन केवल युद्ध जीतने तक सीमित नहीं था? वह सामाजिक एकता और सभी धर्मों के सम्मान के बड़े समर्थक थे. उनके राज्य में हिंदू, मुस्लिम और सभी जाति-पंथ के लोग एकसाथ मिलकर रहते थे. इसी संदेश को मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर महबूब इमाम हुसैन मदुनवर पिछले 30 वर्षों से ढोल बजाकर फैला रहे हैं.

तीन दशक से निभा रहे हैं अनोखी परंपरा!
1986 में छत्रपति उदयनराजे भोसले की मां, छत्रपति कल्पनाराजे भोसले ने गेटवे ऑफ इंडिया पर शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने एक ढोल रखा था. तब पहली बार इस ढोल को डॉ. डी. वाई. पाटिल ने बजाया. इसके बाद बाबूराव जाधव ने यह जिम्मेदारी निभाई, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह कार्य महबूबजी को सौंप दिया गया. तब से लेकर आज तक, महबूबजी सूर्यास्त के समय यह ढोल बजाकर शिवाजी महाराज को सम्मान देते आ रहे हैं.

क्या धर्म ने रोका? जवाब है नहीं!
अक्सर महबूब इमाम हुसैन से यह सवाल किया जाता है कि “क्या आपके धर्म ने आपको इस काम से रोका नहीं?” इस पर वह गर्व से जवाब देते हैं, “शिवाजी महाराज सिर्फ हिंदुओं के नहीं, बल्कि सभी धर्मों के राजा थे. उनकी सेना में हिंदू और मुस्लिम दोनों थे. उन्होंने कभी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया. वह न्यायप्रिय शासक थे, जिन्होंने स्वराज्य के लिए लड़ाई लड़ी.” शिवाजी महाराज के इन्हीं गुणों से प्रेरित होकर महबूबजी ने उनके सम्मान में यह सेवा जारी रखी है.

परिवार की जिम्मेदारियां फिर भी सेवा जारी!
महबूबजी पहले फोटोग्राफर थे, लेकिन इससे उनकी आमदनी ज्यादा नहीं थी. उनके दो बच्चे हैं, जिन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की है. एक बैंक में नौकरी करता है और दूसरा फूड डिलीवरी का काम करता है. इसके बावजूद महबूबजी बिना किसी स्वार्थ के हर दिन यह सेवा निभा रहे हैं. उन्हें इसके लिए कोई पैसा नहीं मिलता, फिर भी वह इसे जारी रखे हुए हैं. हालांकि, उनके सहकर्मी चाहते हैं कि प्रशासन उनके इस योगदान को पहचाने और सराहे.

युवाओं के लिए सीख: इतिहास से जुड़ो!
महबूबजी सिर्फ ढोल बजाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे युवाओं को प्रेरित भी करते हैं. वे कहते हैं, “शिवाजी महाराज के किले देखो, उनका इतिहास पढ़ो, बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.” वह चाहते हैं कि नई पीढ़ी शिवाजी महाराज के न्याय, साहस और स्वशासन के लिए संघर्ष को समझे.

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