Ramkrishna Paramhansa Ke 101 Prerak Prasang | Life, Teachings and Devotion to Maa Kali | Inspirational Incidents of the Great Hindu Saint and Spiritual Guide of Swami Vivekananda
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स्वामी रामकृष्ण परमहंस एक महान् संत, समाज-सुधारक और हिंदू धर्म के प्रणेता थे | उनका मानना था कि यदि मनुष्य के हृदय में सच्ची श्रद्धा और लगन जग जाए तो ईश्वर का साक्षात्कार कतई मुश्किल नहीं है । वे कहते कि ईश्वर एक ही है, मनुष्यों ने उस तक पहुँचने के मार्ग अलग-अलग बना लिये हैं । वे स्वयं माँ काली के अनन्य भक्त थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन उन्हीं की आराधना में व्यतीत किया |
उन्होंने हिंदू धर्म की प्रतिष्ठा का कार्य अपने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि युवा नरेंद्र के रूप में हिंदुत्व की प्रतिष्ठा को विश्वमंच पर प्रस्थापित करने का पुरुषार्थ कर दिखाया। वे स्वयं पढ़े-लिखे नहीं थे, किंतु उन्होंने विश्व को विवेकानंद जैसा सार्वकालिक धर्म-प्रवर्तक दिया | परमहंस के जीवन काल में ही उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैल गई थी। फलस्वरूप मैक्समूलर और रोम्याँ रोलाँ जैसे सुप्रसिद्ध पाश्चात्य विद्वानों ने उनकी जीवनी लिखकर अपने को धन्य माना।
इस पुस्तक में स्वामी रामकृष्ण परमहंस के जीवन से जुड़े रोचक एवं प्रेरक प्रसंगों का संकलन किया गया है। इसकी सामग्री रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद पर उपलब्ध साहित्य से प्राप्त की गई। यह पुस्तक स्वामीजी के जीवन को समझने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है । आशा है, हमारे प्रबुद्ध पाठक इस पुस्तक को पढ़कर स्वामीजी जीवन और जीवन-दर्शन को समझ पाएँगे ।
From the Publisher
Ramkrishan Paramhans Ke 101 Prerak Prasang (Hindi) by Rashmi

यदि मनुष्य के हृदय में सच्ची श्रद्धा और लगन जग जाए तो ईश्वर का साक्षात्कार कतई मुश्किल नहीं है।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस एक महान् संत, समाज-सुधारक और हिंदू धर्म के प्रणेता थे। उनका मानना था कि यदि मनुष्य के हृदय में सच्ची श्रद्धा और लगन जग जाए तो ईश्वर का साक्षात्कार कतई मुश्किल नहीं है। वे कहते कि ईश्वर एक ही है, मनुष्यों ने उस तक पहुँचने के मार्ग अलग-अलग बना लिये हैं। वे स्वयं माँ काली के अनन्य भक्त थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन उन्हीं की आराधना में व्यतीत किया। उन्होंने हिंदू धर्म की प्रतिष्ठा का कार्य अपने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि युवा नरेंद्र के रूप में हिंदुत्व की प्रतिष्ठा को विश्वमंच पर प्रस्थापित करने का पुरुषार्थ कर दिखाया। वे स्वयं पढ़े-लिखे नहीं थे, किंतु उन्होंने विश्व को विवेकानंद जैसा सार्वकालिक धर्म-प्रवर्तक दिया। परमहंस के जीवन काल में ही उनकी ख्याति फैल गई थी। फलस्वरूप मैक्समूलर और रोम्याँ रोलाँ जैसे सुप्रसिद्ध पाश्चात्य विद्वानों ने उनकी जीवनी लिखकर अपने को धन्य माना।इस पुस्तक में स्वामी रामकृष्ण परमहंस के जीवन से जुड़े रोचक एवं प्रेरक प्रसंगों का संकलन किया गया है। इसकी सामग्री रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद पर उपलब्ध साहित्य से प्राप्त की गई। यह पुस्तक स्वामीजी के जीवन को समझने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है। आशा है, हमारे प्रबुद्ध पाठक इस पुस्तक को पढ़कर स्वामीजी के जीवन और जीवन-दर्शन को समझ पाएँगे।.




KALAM KI ATMAKATHA BY DR. RASHMI
‘‘बेटा; तुम कमजोर हो गए हो। अपने खाने-पीने का ध्यान रखा करो।’’ ‘‘न तो! कमजोर कहाँ हुआ हूँ; चच्चा! पहले जैसा ही तो हूँ। थोड़ा लंबा हो गया हूँ; इसलिए आपको कमजोर लग रहा होऊँगा।’’ मैंने हँसकर कहा। ‘‘बड़े भाई की दुकान पर जा रहे हो?’’ ‘‘जी।’’ मेरे बड़े भाई मुस्तफा कलाम रेलवे स्टेशन रोड पर परचून की एक दुकान चलाते थे। मैं जब भी घर लौटता तो वे अकसर मुझे अपनी दुकान पर बुला लेते और कुछ देर के लिए दुकान मेरे जिम्मे छोड़ देते। —इसी पुस्तक से —— 1 —— भविष्यद्रष्टा; राष्ट्रसेवी; युगप्रवर्तक; प्रेरणापुरुष; युवाओं के लिए अनुकरणीय व्यक्तित्व भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का संपूर्ण जीवन अत्यंत रोचक एवं पठनीय उपन्यास के रूप में; जो हर पाठक के लिए अनुपम धरोहर है।
KALAM, TUM LAUT AAO BY DR. RASHMI
आज भले ही डॉ. कलाम तन से हमारे बीच नहीं हैं; लेकिन ज्ञान और प्रेरणा के रूप में वे हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जीवित रहेंगे। आनेवाले युग-युगों तक उनके शब्द हमें झंकृत करते रहेंगे; प्रेरित करते रहेंगे। उनका हृदय इतना विशाल था कि वे मनुष्यमात्र के हित की बात सोचते थे। डॉ. कलाम जैसी विभूति युगों-युगों में जन्म लेती है और समूचे मानव जगत् को अपने ज्ञान व प्रेम के माध्यम से विकास का मार्ग दिखाती है। इसलिए; हमें उन जैसे महान् व्यक्ति की आवश्यकता हमेशा रहती है और रहेगी। यही कारण है कि हम आज भी अपने हृदय की गहराइयों से पुकारते हैं कि कलाम; तुम लौट आओ…देश को तुम्हारी बहुत जरूरत है…कलाम; तुम लौट आओ!
Atalji Ki Prerak Kahaniyan DR. RASHMI
एक दोपहर अटलजी और दीनदयालजी जमीन पर चटाई बिछाकर लेट गए। वहीं सिराहने कुछ ईंटें रखी हुई थीं। दोनों ने उन्हीं ईंटों को तकिए की तरह अपने सिर के नीचे लगा लिया। उस समय भारत प्रेस के हिसाब-किताब का काम श्री राधेश्याम कपूरजी देखा करते थे। वैसे तो उनकी अमीनाबाद में अपनी दुकान भी थी, लेकिन वे उसमें कम ही बैठते, क्योंकि उनका दिल तो भारत प्रेस में ही लगा रहता था।…तो अचानक वे आ गए और दोनों को ऐसे सोता देख द्रवित हो उठे, जबकि सच तो यह है कि अटलजी और दीनदयालजी को किसी भी प्रकार का कोई कष्ट महसूस ही नहीं हुआ था, वे दोनों तो थकान के बाद की नींद का आनंद ले रहे थे। बाद में तो यह अकसर ही होने लगा। कोई भी सोता तो उन्हीं ईंटों का तकिया लगा लेता। उन दिनों संघ की शाखा में रोज कबड्डी खेली जाती थी। अटलजी को भी कबड्डी खेलना बड़ा अच्छा लगता था, लेकिन वे ठीक से खेल ही नहीं पाते थे। खेल के नियम तो सारे जानते थे, लेकिन दरअसल कारण यह था कि उन दिनों वे बहुत दुबले-पतले हुआ करते थे, इसलिए वे जिसके भी पाले में आते, उस पाले के स्वयंसेवक अपना सिर पकड़ लेते। —इसी संग्रह से
Whatsapp Rishte Naton Ki Kahaniyan by Rashmi
रिश्ते प्रेम का पर्याय है और प्रेम उम्र; जाति; धर्म या किसी और तरह का बंधन नहीं मानता। ऐसा ही एक रिश्ता हमारा मोबाइल के साथ भी बन गया है। आज संचार क्रांति के साथ-साथ मोबाइल हम सभी के जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। हम सभी मोबाइल का प्रयोग करते हैं। तकनीक के क्षेत्र में हम नित नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। आज प्राय: सभी व्हाट्सएप से परिचित हैं और अमूमन हम सभी इस एप का प्रयोग भी करते हैं। मित्रो! व्हाट्सएप पर की गई चैटिंग अकसर एक कहानी या संदेश छोड़ जाती है; यदि हम उसे पहचानने की कोशिश करें तो! इस पुस्तक में व्हाट्सएप की उन्हीं चैटिंगों में से उभरती कहानी को आप सभी के सम्मुख लाने का प्रयास किया गया है। ये छोटी-छोटी कहानियाँ आपकी अपनी कहानियाँ हैं; आपके अपने रिश्तों की कहानियाँ हैं। इन कहानियों को पढ़ते हुए आप खुद को अपनों के करीब महसूस करेंगे।हमें विश्वास है कि आप इन कहानियों की मिठास में डूब जाएँगे और उस मिठास को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी साझा करेंगे।
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ASIN : 9351862003
Publisher : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.; First Edition (1 January 2016); New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Language : Hindi
Paperback : 184 pages
ISBN-10 : 9789351862000
ISBN-13 : 978-9351862000
Reading age : 18 years and up
Item Weight : 400 g
Dimensions : 20.32 x 12.7 x 1.27 cm
Country of Origin : India
Net Quantity : 1 Count
Packer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Generic Name : Book
Reviewer: annu
Rating: 5.0 out of 5 stars
Title: Wonderful book
Review: Everyone must read this book
Reviewer: Pramod Prajapati
Rating: 5.0 out of 5 stars
Title: Good book
Review: Good book
Reviewer: Niraj M.
Rating: 4.0 out of 5 stars
Title: Very good
Review: Very good
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