Explainer: कैसे मिलती है किसी देश को ओलंपिक मेजबानी, क्या है उसकी प्रक्रिया

Explainer: कैसे मिलती है किसी देश को ओलंपिक मेजबानी, क्या है उसकी प्रक्रिया

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हाइलाइट्स

आईओए ने आईओसी को औपचारिक रूप से लेटर ऑफ इंटेंट भेजा हैभारत ने 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए दिलचस्पी दिखाई हैभारत सहित दस देशों ने ओलंपिक खेलों की मेजबानी में रुचि दिखाई है

भारत में ओलंपिक: भारत को खेल महाशक्ति बनाने के नजरिये की दिशा में उसके ओलंपिक संघ ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक काउंसिल (आईओसी) को औपचारिक रूप से आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) भेजा है. इसमें भारत ने 2036 में ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए दिलचस्पी दिखाई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौकों पर ओलंपिक और पैरालिंपिक खेलों की मेजबानी में रुचि व्यक्त कर चुके हैं. भारत के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के दावे को लेकर दो बातें जानना बेहद जरूरी है. पहला, ओलंपिक खेल 2036 के मेजबान पर फैसला 2025 में होगा. दूसरा, लगभग दस शहर इन खेलों की मेजबानी में रुचि रखते हैं.

कैसे चुना जाता है मेजबान देश
आईओसी ने 2019 में अधिक सहयोगात्मक प्रक्रिया का विकल्प चुनने के लिए मेजबान तय करने की प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया को रोक दिया. अब आईओसी इच्छुक देशों के साथ सीधे बात करती है. आईओसी ने प्‍लानर्स और प्रेजेंटेशंस को समीकरण से हटा दिया है. इससे प्रक्रिया में होने वाला खर्च काफी कम हो गया है. उदाहरण के लिए, ब्रिस्बेन गेम्स 2032 की लागत उम्मीदवारी फेज के दौरान 80 फीसदी कम हो गई थी. यह लागत में बड़ी कमी है, जो भारत के पक्ष में काम कर सकती है. आईओसी के एक अधिकारी ने बताया कि पहले हम एक दावेदार को दूसरे के खिलाफ खड़ा करते थे. फिर वे एकदूसरे को पछाड़ने के लिए आकर्षक वीडियो, किताबों की सूची तैयार करते थे. अब हमें इसकी जरूरत नहीं है. मेजबान देश हमसे बात करना चाहते हैं, ना कि प्रतिस्‍पर्धी देश से. इसका मतलब है कि अब कोई वोट और समय सीमा नहीं है.

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आईओसी कैसे देता है किसी देश को तरजीह
आईओसी उन स्थानों को चुनकर खेलों की मेजबानी को ज्‍यादा टिकाऊ बनाने की कोशिश कर रहा है, जहां पहले से ही जरूरी बुनियादी ढांचा मौजूद है. उदाहरण के लिए, पेरिस में खेलों के लिए जरूरी 95 फीसदी स्थान पहले से ही तैयार थे. लॉस एंजिल्स 2028 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी कर रहा है. उसे खेलों के लिए एक भी नया स्टेडियम नहीं बनाना पड़ेगा. हालांकि, ऐसे मेजबान अपवाद हैं, जहां नए ढांचे का निर्माण विरासत का हिस्सा होगा. इस पहलू पर विचार करें तो भारत को बड़ा फायदा हो सकता है. पेरिस ने एक अच्छा स्विमिंग पूल और खेल गांव बनाया था. उनका कहना था कि उनके लिए ये एक दीर्घकालिक विरासत है. ठीक इसी तरह अगर भारत के किसी शहर ने कहा कि वो अपने खेल के बुनियादी ढांचे में सुधार करना चाहता है और इस पैसे को किसी भी तरह निवेश कर लेगा तो प्रक्रिया नहीं रुकेगी.

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आधिकारिक संवाद शुरू होने पर क्या होगा?
मेजबानी के दावे के लिए आधिकारिक संवाद होना सबसे बड़ा कदम है. आईओसी के भीतर मुख्य टीम फ्यूचर होस्ट कमीशन है. इस आयोग की स्थापना आईओसी के बोली लगाने के नजरिये को बदलने के फैसले के बाद की गई थी. आयोग के सदस्य आईओसी कार्यकारी बोर्ड के सदस्य या किसी ऐसे देश के नागरिक नहीं होते हैं, जो मेजबानी का इच्छुक है. आईओसी के एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, आयोग हर बोली को दोबारा देखेगा और अपने अनुभव के आधार पर निर्णय लेगा. फिर कार्यकारी बोर्ड को सिफारिश करेगा कि बातचीत के लिए आगे बढ़ना चाहिए या नहीं.

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कितना समय लगेगा पूरी प्रक्रिया में?
ओलंपिक मेजबानी के लिए पहले किसी बोली की प्रक्रिया पूरी होने में कई साल लग जाते थे. अब प्रक्रिया बदलने के बाद यह अवधि काफी कम हो गई है. आईओसी के एक अधिकारी के मुताबिक, पहले प्रक्रिया पूरी होने में सात साल तक का वक्‍त लग जाता था. अब इस प्रक्रिया के पूरी होने की अवधि सभी पक्षों की तत्‍परता पर निर्भर करती है. बातचीत के किसी दौर में जब दोनों पक्षों को लगता है कि अब आगे बढ़ा जा सकता है, तो एक कदम आगे बढ़ा जा सकता है.

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और कौन-कौन है दौड़ में शामिल
भारत उन दस देशों में शामिल है, जिन्होंने 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी में रुचि दिखाई है. 2036 खेलों की मेजबानी में शुरुआती रुचि दिखाने वाले दस देशों में मेक्सिको (मेक्सिको सिटी, ग्वाडलजारा-मॉन्टेरी-तिजुआना), इंडोनेशिया (नुसंतारा), तुर्की (इस्तांबुल), भारत (अहमदाबाद), पोलैंड (वारसॉ, क्राको), मिस्र (नई प्रशासनिक राजधानी) और दक्षिण कोरिया (सोल-इंचियोन) शामिल हैं. भारत ने 2010 में कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी की थी. भारत 1951 और 1982 में एशियन गेम्स का आयोजन कर चुका है. हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग जैसे तमाम खेलों की वर्ल्ड चैंपियनशिप भारत में होती रहती हैं. निश्चित तौर पर भारत के पास बड़े आयोजन का अनुभव है.

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