हर हफ्ते दो बच्चों की लाश भारत भेजते थे: देश लौटे राजदूत संजय वर्मा ने बताया- कनाडा में समोसा बेच रहे, ड्राइविंग कर रहे भारतीय इंजीनियर

हर हफ्ते दो बच्चों की लाश भारत भेजते थे:  देश लौटे राजदूत संजय वर्मा ने बताया- कनाडा में समोसा बेच रहे, ड्राइविंग कर रहे भारतीय इंजीनियर

[ad_1]

  • हिंदी समाचार
  • आजीविका
  • कनाडा के भारतीय छात्र भारतीय उच्चायुक्त जस्टिन ट्रूडो | खालिस्तानी निज्जर हत्याकांड मामला

2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
उद्धरणछवि

एक समय हम हर हफ्ते कनाडा से दो भारतीयों बच्चों की लाशें बॉडी बैग में भरकर भारत भेज रहे थे। उन्होंने कनाडा में आत्महत्या कर ली थी। जमीन बेच कर लोग अपने बच्चों को कनाडा भेजते हैं, लेकिन असफल होने के बाद ये बच्चे वापस घर लौटने का सोच नहीं पाते, आखिर क्या मुंह लेकर जाएंगे?

उद्धरणछवि

ये शब्द हैं बीते सप्ताह कनाडा से भारत लौटे राजदूत संजय वर्मा के। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि भारतीयों को अपने बच्चों को कनाडा भेजने के पहले दो बार सोचना चाहिए।

कनाडा में पढ़ाई कर रहे छात्रों की क्या स्थिति है, खालिस्तानी इन छात्रों को क्यों धमका रहे हैं, इस खबर में जानेंगे…

कनाडा में चाय-समोसा बेच रहे भारतीय छात्र, खालिस्तानियों ने बनाया गैंगस्टर

खालिस्तानी कट्टरपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले से कनाडा और भारत के रिश्ते बिगड़ गए हैं। बीते सप्ताह 17 और 18 अक्टूबर को दोनों देशों ने अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है।

कनाडा में तैनात भारतीय राजदूत संजय वर्मा के मुताबिक, उन्हें कनाडा में ओटावा के समयानुसार 19 अक्टूबर की रात 11:59 बजे तक कनाडा छोड़ना था। उन्होंने बताया, ‘अगर मैं रुक जाता तो मुझे कनाडा की पुलिस की जांच का सामना करना पड़ता।’

भारतीय छात्रों के मुद्दे पर संजय कहते हैं बड़ी तादाद में भारतीय छात्र कनाडा के नागरिकों से 4 गुना ज्यादा फीस दे रहे हैं, लेकिन उन्हें उनकी उम्मीद के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

एक-एक कमरे में 8 बच्चे रह रहे हैं। कॉलेज में पूरे सप्ताह में एक क्लास होती है। भारत के अच्छे घरों से आए बच्चे सारा दिन दुकानों पर काम करते हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद ऊबर में गाड़ी चला रहे हैं, दुकानों में चाय समोसे बेच रहे हैं।

संजय के मुताबिक,

उद्धरणछवि

बच्चों को कनाडा भेजने के पहले दो बार सोचना चाहिए। आज आप यूट्यूब पर जाएं तो आपको कनाडा में रहे बच्चों के वीडियो मिल जाएंगे, जो आपको वहां के छात्रों की असली स्थिति बता देंगे। कनाडा में खालिस्तानी गुंडे लोग भारतीय छात्रों को धमका रहे हैं, उन पर हमला कर रहे हैं और उन्हें खालिस्तानी गैंग ज्वाइन करने को कह रहे हैं। कई छात्र खालिस्तानी गैंगस्टर बन गए हैं। ये गैंग हथियार, ड्रग्स, वेश्यावृत्ति जैसे सभी बुरे काम करते हैं।

उद्धरणछवि

20 सालों में अमेरिका की बजाय कनाडा गए 120 गुना ज्यादा भारतीय

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) की एक स्टडी के मुताबिक, साल 2000 से 2021 के बीच के 20 सालों में कनाडाई यूनिवर्सिटीज में भारतीयों का रजिस्ट्रेशन 5,800% से ज्यादा बढ़ा है।

वहीं अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या सिर्फ 45% बढ़ी है। इसे और आसान शब्दों में समझें तो कनाडा में करीब 58 गुना भारतीय छात्र बढ़े हैं, वहीं अमेरिका में डेढ़ गुने से भी कम भारतीय छात्र बढ़े।

स्टडी के मुताबिक, अभी तक विदेशी छात्रों के अलावा हाई-स्किल्ड यानी ज्यादा पढ़े-लिखे और क्षमतावान विदेशी नागरिक अमेरिका के बजाय कनाडा को चुन रहे थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका में विदेशियों के लिए H-1B वीजा स्टेटस यानी स्थायी निवास की मंजूरी मिलना मुश्किल है, वहीं कनाडा में स्थायी निवास पाना आसान है। कनाडा की इमीग्रेशन पॉलिसी यानी प्रवास की नीतियां आसान हैं, जिसके चलते भारत के छात्र कनाडा का रुझान रखते हैं।’

जनवरी 2015 में कनाडा ने एक्सप्रेस एंट्री प्रोग्राम शुरू किया था, जिसके तहत उन काबिल पेशेवरों को वरीयता दी गई जो कनाडा में पढ़े हैं या वह अस्थायी रूप से रहे हैं।

जून 2017 में कनाडा ने बाहरी कंपनियों को अपने यहां ऑफिस बनाने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए ग्लोबल स्किल स्ट्रेटजी प्रोग्राम शुरू किया था। इसके उलट अमेरिका के किसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद भी H-1B वीजा पाने में मुश्किल आती है। करीब 12 लाख भारतीय अमेरिका के वीजा के इंतजार में हैं।

कनाडा विदेश के स्थायी निवासियों की तादाद 20% कटौती करेगा

हालांकि भारत और कनाडा के बीच जारी विवाद के बीच कनाडा में रह रहे भारतीय छात्र असमंजस में हैं। उन्हें नहीं पता है कि उन्हें कॉलेज की पढाई पूरी करने के लिए परमिट बढ़ाया जाएगा या नहीं। स्थायी निवास चाहने वाले भारतीय भी चिंतित हैं।

अब कनाडा की सरकार ने तय किया है कि वह इमीग्रेशन में 20% की कटौती करेगा। इसका मतलब है कि अब हर साल 20% कम विदेशियों को कनाडा में रहने का मौका मिलेगा। कनाडा साल-दर साल परमानेंट रेजीडेंसी यानी स्थायी निवास भी कम करेगा।

यानी कनाडा 2025 में 3.95 लाख परमानेंट रेजिडेंसी, 2026 में 3.80 लाख परमानेंट रेजिडेंसी और 2027 में 3.65 लाख परमानेंट रेजिडेंसी ही देगा, जबकि 2024 में अब तक 4.85 लाख लोगों को स्थायी रूप से कनाडा में रहने की अनुमति दी गई है। वहीं साल 2025 में कनाडा में 3.30 लाख लोगों को अस्थायी तौर पर रहने की इजाजत मिलनी थी, अब यह संख्या भी घटकर 3 लाख रह जाएगी।

कनाडा में सिर्फ 10 हजार खालिस्तानी, ट्रूडो जनता को भटका रहे

संजय इंटरव्यू में बताते हैं कि कनाडा में सिर्फ 10 हजार के आसपास खालिस्तानी हैं। ये लोग खालिस्तान के नाम पर मानव तस्करी, ड्रग्स और हथियारों का धंधा करते हैं। इससे आने वाला पैसा गुरुद्वारों में इकठ्ठा किया जाता है और इसका गलत कामों में इस्तेमाल किया जाता है।

कनाडा में हुए भारत विरोधी प्रदर्शनों की तस्‍वीरें।

कनाडा में हुए भारत विरोधी प्रदर्शनों की तस्‍वीरें।

इनके प्रभाव में बाकी लोग आ जाते हैं। उनकी संख्या भी मिला लें तो कुल खालिस्तानी समर्थकों की संख्या सिर्फ एक लाख के आसपास होगी। ये संख्या बहुत कम है, लेकिन इन्हें कनाडा में प्रभावशाली राजनीतिक लोगों और सरकार का समर्थन मिला हुआ है।

मीडिया सर्वे यह बताते हैं कि ट्रूडो की लोकप्रियता घट रही है, कहा जा रहा है कि अगर आज कनाडा में आज चुनाव हो जाएं तो वह चुनाव नहीं जीत पाएंगे। हालांकि ट्रूडो खालिस्तान के मुद्दे और निज्जर की हत्या के मामले में भारत को घसीटकर लोगों का ध्यान भारत की तरफ मोड़ना चाहते हैं।

एजुकेशन से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…

नर्सरी की फीस 1.5 लाख से ज्‍यादा, फीस रसीद वायरल:पेरेंट्स बोले- 300% फीस बढ़ाई, नाम काट दिया, स्‍कूल गए तो बाउंसर्स ने रोक लिया

एक स्कूल की नर्सरी क्लास की फीस की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है। हालांकि इसमें स्कूल का नाम छिपाया गया है, लेकिन इसमें जो फीस लिखी है, वह चौंकाने वाली है। अक्सर दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों पर मनमानी फीस वसूलने के आरोप लगते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…

[ad_2]