स्कूल मैनेजर चला रहा था फर्जी आधार-पेन कार्ड का नेक्सस: खुद की वेबसाइट बनाई, 28 हजार से ज्यादा लोगों को जोड़ा, साइट के कई नाम बदले – Rajasthan News

स्कूल मैनेजर चला रहा था फर्जी आधार-पेन कार्ड का नेक्सस:  खुद की वेबसाइट बनाई, 28 हजार से ज्यादा लोगों को जोड़ा, साइट के कई नाम बदले – Rajasthan News

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टोंक पुलिस ने साइबर क्रिमिनल नीरज मीणा को गिरफ्तार किया है। नीरज ऑनलाइन फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार करने का नेक्सस चला रहा था।

आरोपी अपने गिरोह के साथ मिलकर कोई भी सरकारी दस्तावेज चंद मिनटों में तैयार कर देता था। किसी भी राज्य का जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन बना देते थे। यह सब हो रहा था एक वेबसाइट के जरिए।

वेबसाइट की कोडिंग इस तरह से की गई थी कि उसमें हर फीचर्स मौजूद थे। गाड़ी की आरसी हो या आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र हो या पेन कार्ड, सब कुछ वेबसाइट के जरिए कुछ ही देर में बना देते।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

पुलिस की गिरफ्त में ऑनलाइन फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार करने का आरोपी नीरज मीणा।

रिश्तेदार के स्कूल में नौकरी के साथ फर्जी डॉक्यूमेंट का रैकेट

आरोपी नीरज मीणा(27) देवी खेडा का रहने वाला है। साइंस ग्रेजुएशन किया हुआ है। इस दौरान उसने वेबसाइट बनाने के लिए कोडिंग भी सीखी थी।

ग्रेजुएशन के बाद नीरज ने अपने ही गांव में ई-मित्र का काम शुरू किया था। ढाई साल काम करने के बाद उसने ई-मित्र बंद कर दिया। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में यूटयूब पर गलत रास्ते तलाशने लगा।

वह टेलीग्राम ऐप से भी जुड़ा था। टेलीग्राम पर ही एक ग्रुप पर साल 2022 दिसंबर में उसकी बातचीत एक युवक से हुई। युवक ने उसे ऑनलाइन फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार करने काम के बारे में बताया। इस पर नीरज राजी हो गया।

युवक ने 6 हजार रुपए लेकर एक डोमेन नीरज को उपलब्ध करवाया। इसके बाद उसे प्रिंट पोर्टल की सदस्यता दी गई। नीरज और डोमेन उपलब्ध करवाने वाले युवक ने मिलकर वेबसाइट तैयार की। इसे सीएससी प्रिंट पोर्टल नाम दिया।

इसमें पेन कार्ड, बर्थ सर्टिफिकेट, गाडी की आरसी, आधार कार्ड के काम की सदस्यता नीरज ने ली थी। बाद में नीरज ने अपने रिश्तेदार के स्कूल में काम करना शुरू कर दिया।

वहां स्कूल का मैनेजमेंट देख रहा था और 14 हजार रुपए सैलरी में नौकरी कर रहा था। वहीं के लैपटॉप से वह वेबसाइट संचालित करता था। जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।

मोबाइल नंबर चेंज, ऑरिजनल डॉक्यूमेंट डाउनलोड करते थे

आरोपी को गिरफ्तार करने वाली साईबर सेल के राजेश राज ने बताया कि वेबसाइट के जरिए नीरज मीणा आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और बर्थ सर्टिफिकेट का काम कर रहा था।

इसमें आधार कार्ड में मोबाइल नंबर चेंज करना, बिना ओटीपी ओरिजनल आधार डाउनलोड करना और मैनुअली आधार तैयार करने का काम शामिल था। इसी तरह वोटर आईडी में भी यही तीन स्टेप और पेन कार्ड में भी यही सर्विस प्रोवाइड करवा रहा था।

आरोपी की वेबसाइट का होमपेज। इसी वेबसाइट से फर्जी आधार और पेनकार्ड बनाए जा रहे थे।

आरोपी की वेबसाइट का होमपेज। इसी वेबसाइट से फर्जी आधार और पेनकार्ड बनाए जा रहे थे।

फर्जीवाड़ा…बिना ओटीपी ओरिजनल आधार डाउनलोड

नीरज ने वेबसाइट पर इस तरह से कोडिंग की थी कि आधार की वेबसाइट से वह डाटा फेच कर रहे थे। आशंका यह भी है कि सरकारी वेबसाइटों में इन्होंने सेंध लगाई हो।

क्योंकि अगर किसी का आधार डाउनलोड करना होता है तो सिक्योरिटी के लिहाज से एक ओटीपी आधार कार्ड होल्डर के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जाता है।

आरोपी ने इस सिक्योरिटी चैनल को वेबसाइट पर बाईपास किया हुआ था। ऐसे में किसी का भी ओरिजिनल आधार कार्ड आसानी से डाउनलोड कर सकते थे। इसके बाद उसमें एडिटिंग भी कर सकते थे।

मैनुअली आधार कार्ड बनाना

वेबसाइट पर एक फीचर मैनुअल आधार का भी तैयार किया हुआ था। इसमें किसी भी तरह के थंब इंप्रेशन या ओटीपी की जरूरत नही पड़ती थी। आधार का परफोर्मा इसमें अपलोड रहता है।

ऐसे में किसी भी फोटो, नाम के साथ आधार कार्ड दो मिनट में तैयार कर दे देते थे। सबसे बडी बात ये थी कि इस आधार पर क्यूआर कोड भी होता था, जैसे ओरिजनल पर आता है।

इसे स्कैन करने पर जो फर्जी आधार में डिटेल है वही नजर आती ताकि कभी चैक करने पर किसी को शक न हो। हालांकि ऐपिक वेबसाइट पर इन आधार की कोई जानकारी नही होती।

बर्थ सर्टिफिकेट बनाना

आरोपी वेबसाइट के जरिए बर्थ सर्टिफिकेट भी बना रहे थे। देश के किसी भी राज्य का बर्थ सर्टिफिकेट बनाकर दे देते थे। इनके पास हर जिले का बर्थ सर्टिफिकेट का प्रारूप था। इसमें डेट, टाइम भरकर ये लोग बर्थ सर्टिफिकेट तैयार कर प्रिंट दे देते थे।

जबकि नियमानुसार बर्थ सर्टिफिकेट में संबधित अस्पताल से डेटा निगम या बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्था तक जाता है। उसके बाद बर्थ सर्टिफिकेट तैयार होता है। इस काम में उनके लोकल लोग भी मदद करते थे। इनमें ईमित्र संचालक भी शामिल है।

इसी तरह से ये गिरोह वोटर आईडी, पेन कार्ड में भी काम कर रहा था। इसके अलावा गाडी की आरसी भी ये ऑनलाइन ही बनाकर दे देते थे। हालांकि हकीकत में संबधित विभागों में इनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं होता।

इस वेबसाइट पर इस तरह से अलग-अलग ऑप्शन आते हैं। इसमें कोई भी फीचर सिलेक्ट कर डॉक्यूमेंट तैयार किए जा सकते हैं। आधार मैनुअल का भी ऑप्शन इसमें है।

इस वेबसाइट पर इस तरह से अलग-अलग ऑप्शन आते हैं। इसमें कोई भी फीचर सिलेक्ट कर डॉक्यूमेंट तैयार किए जा सकते हैं। आधार मैनुअल का भी ऑप्शन इसमें है।

28 हजार से ज्यादा लोग जुडे़ हुए, ई&मित्र संचालक भी

नीरज मीणा ने जो वेबसाइट बनाई थी उससे 28 हजार से ज्यादा लोग जुडे़ हुए थे। नीरज ने बाहर के गैंग से टाईअप कर अपनी वेबसाइट तैयार की। इसके बाद अपनी वेबसाइट से लोगों को जोड़ने लगा।

इसके लिए वेबसाइट पर जाकर लॉगिन करना होता था। जहां अपना नाम, मेल आईडी, फोन नंबर और बैकिंग डिटेल भरकर लोग वेबसाइट पर रजिस्टर हो सकते थे।

इसके बाद जब भी काम करना हो तो वेबसाइट पर लॉगिन पासवर्ड डालकर काम कर सकते थे। जो लोग इससे जुडे हुए है उसमें कई ईमित्र संचालक भी हैं।

ऐसे में इनका काम और आसान हो जाता था। पुलिस टीम को वेबसाइट की जांच में रजिस्टर्ड लोगों की संख्या की जानकारी मिली है। ये देशभर का डाटा है।

एसपी विकास सांगवान ने बताया कि गैंग झारखंड-बिहार के होने की बात सामने आ रही है। हालांकि गिरोह से जुडी जानकारियां अभी शुरुआती स्टेज पर हैं। ऐसे में अभी जांच जारी है।

हर काम के लिए रुपए तय, ऑनलाइन पेमेंट

एसपी सांगवान ने बताया कि वेबसाइट पर काम के लिए अलग अलग रेट तय था। साल 2023 से नीरज ने ये काम शुरू किया था। इस काम से अब तक वह 16.50 लाख की कमाई कर चुका है।

मोबाइल नंबर चेंज करने के 120, डॉक्यूमेंट डाउनलोड करने के 30, मैनुअल आधार कार्ड बनाने के 150 और बर्थ सर्टिफिकेट बनाने के 150 रुपए तय थे। वेबसाइट पर ऑनलाइन वॉलेट बना हुआ है।

इसमें सभी रजिर्स्टड लोग पैसा जमा करके रखते थे। जब भी काम होता तो उसके हिसाब से चार्ज कट जाता और नीरज के अकाउंट में चला जाता। यहां उसने अपनी मां के अकाउंट नंबर दिए हुए थे।

जिस अकांउट में नीरज पैसे जमा करवाता था, वह भी वॉलेट के जरिए ही होता था। उसके बारे में भी पुलिस पड़ताल कर रही है। हालांकि ये अकाउंट सिक्योर बताया जा रहा है। इसके बारे में अभी जानकारी नहीं लग सकी है।

बार-बार बदलता था पोर्टल का नाम

जिस तरह से नीरज वेबसाइट बनाकर काम कर रहा था, गिरोह ने कई और लोगों को भी वेबसाइट होस्ट करके दी है। नीरज पुलिस और सरकारी संस्थाओ से बचने के लिए बार-बार वेबसाइट का नाम चेंज करता था। ताकि वह पकड़ में न आए।

दिल्ली में आधार संस्था को शक होने पर उन्होंने टोंक पुलिस को जानकारी दी। जब नीरज मीणा के बारे में सुराग लगा तो पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।

बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि हाल में ही उसने वेबसाइट का नाम बदलकर मित्रा कर दिया था। आरोपी चार दिन के पुलिस रिमांड पर है।

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