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मूवी रिव्यू- द मेहता बॉयज: सिर्फ पिता-पुत्र नहीं, बल्कि यह फिल्म इंसानी रिश्तों की कहानी है, डायरेक्शन में भी बोमन की अच्छी शुरुआत
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14 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी
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एक्टर से डायरेक्टर बने बोमन ईरानी की फिल्म ‘द मेहता बॉयज’ ओटीटी प्लेटफार्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म को खुद बोमन ईरानी ने प्रोड्यूस भी किया और फिल्म की कहानी उन्होंने अकादमी पुरस्कार विजेता अलेक्जेंडर दिनलारिस जूनियर के साथ लिखी है। इस फिल्म में बोमन ईरानी के अलावा अविनाश तिवारी, श्रेया चौधरी और पूजा सरूप की मुख्य भूमिकाएं हैं। इस फिल्म की लेंथ 1 घंटा 56 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार की रेटिंग दी है।

फिल्म की स्टोरी क्या है?
फिल्म की कहानी पिता-पुत्र के भावनात्मक रिश्ते पर आधारित है। फिल्म की कहानी की शुरुआत मुंबई से शुरू होती है। आर्किटेक्ट अमय मेहता (अविनाश तिवारी) को ऑफिस मीटिंग के दौरान अपनी मां के निधन का पता चलता है। वह अपने गांव पहुंचता है। मां के निधन के बाद अमय की बहन अनु (पूजा सरूप) अपने पिता शिव मेहता (बोमन ईरानी) को अपने साथ अमेरिका ले जाना चाहती है। परिस्थितियां कुछ ऐसी बनती हैं कि अनु को अकेले अमेरिका जाना पड़ता है और शिव को दो दिनों के लिए अमय के मुंबई के घर में रहना पड़ जाता है। चुकी कि पिता और पुत्र के बीच आपसी मतभेद है। किस तरह से दोनों एक साथ रहने पर मजबूर होते हैं और इस दौरान कैसे उन्हें पिता-पुत्र के बीच आपसी रिश्तों का अहसास होता है। फिल्म की कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।
स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है?
देखा जाए तो इस फिल्म के असली हीरो बोमन ईरानी ही है। जिस तरह से उन्होंने पत्नी के निधन के बाद आत्मनिर्भर बनने का प्रयास किया है। वह कबीले तारीफ है। अविनाश तिवारी का इस फिल्म में एक अलग ही अंदाज देखने को मिला है। जिस तरह से उन्होंने अपने किरदार को जिया है। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि यह फिल्म उनके करियर के लिए बहुत ही खास किरदार है। अमय की प्रेमिका जोया की भूमिका में श्रेया चौधरी ने अपने किरदार के साथ पूरी तरह से न्याय करने की कोशिश की है। पूजा सरूप छोटे से ही सीन में प्रभावशाली लगीं हैं।

फिल्म का डायरेक्शन कैसा है?
निर्देशक के रूप में बोमन ईरानी की यह पहली फिल्म है। उन्होंने जिस तरह से पिता-पुत्र के भावनात्मक रिश्ते को फिल्म में पिरोया है। वह कबीले तारीफ है। फिल्म शुरू से अंत तक दर्शकों को एक धागे में बांधे रखती है।
फिल्म का म्यूजिक कैसा है?
इस फिल्म में ऐसा कोई गीत नहीं, जिसकी चर्चा की जाए। फिल्म की कहानी जिस तरह से आगे बढ़ती है, उसे देखते हुए यही लगता है कि इसमें किसी खास गाने की गुंजाइश नहीं बनती है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है, जो कहानी को प्रभावशाली बनाता है।

फिल्म का फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं
यह एक ऐसी फिल्म है, जिसे एक बार जरूरी देखनी चाहिए। यह फिल्म नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों की ऐसी कहानी है। जिसे हर किसी को समझना बहुत जरूरी है।
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