दिल्ली में एयर क्वालिटी ‘गंभीर’, 5वीं तक स्कूल ऑनलाइन लगेंगे: निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर रोक, NCR से आने वाली बसों की एंट्री बैन

दिल्ली में एयर क्वालिटी ‘गंभीर’, 5वीं तक स्कूल ऑनलाइन लगेंगे:  निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर रोक, NCR से आने वाली बसों की एंट्री बैन

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  • दिल्ली में प्रदूषण ‘गंभीर’ श्रेणी में, इस सीज़न में पहली बार, AQI बढ़कर 429 हुआ

दिल्ली1 दिन पहले

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दिल्ली में गुरुवार को 31 इलाकों में प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया था।

दिल्ली की एयर क्वालिटी गुरुवार को ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सभी प्राइमरी स्कूलों (यानी पांचवीं क्लास तक) को अगले आदेश तक ऑनलाइन चलाने के निर्देश दिए।

गुरुवार को सीजन में पहली बार एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 424 दर्ज किया गया। ये 13 नवंबर के मुकाबले छह अंक ज्यादा है। दिल्ली के 39 पल्यूशन मॉनिटरिंग स्टेशंस में से 27 ने एयर क्वालिटी को गंभीर बताया। इससे हवा में सांस लेना और मुश्किल हो गया।

इसके बाद कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने NCR यानी हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आने वाली बसों पर रोक लगा दी। हालांकि इलेक्ट्रिक व्हीकल, CNG वाहनों और BS-4 डीजल बसों को इससे छूट मिलेगी।

दिल्ली-NCR में निर्माण, तोड़फोड़ पर रोक

  • दिल्ली-NCR में निर्माण, खनन और तोड़फोड़ पर रोक रहेगी।
  • दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल वाहन भी नहीं चलेंगे।
  • दिल्ली में BS-3 डीजल के इमरजेंसी व्हीकल के अलावा इस स्तर के सभी मीडियम गुड्स व्हीकल पर भी रोक रहेगी।
  • इसके अलावा मशीन से सड़कों की सफाई की फ्रिक्वेंसी बढ़ाने और हैवी ट्रैफिक वाले रूट पर पीक आवर से पहले पानी का छिड़काव करने जैसे उपाय किए जाएंगे।
  • ये सभी प्रतिबंध और उपाय 15 नवंबर सुबह 8 बजे से लागू होंगे। इन्हें ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे फेज के तहत लागू किया जा रहा है।
दिल्ली में रोजाना पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

दिल्ली में रोजाना पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने कहा था- हम प्रतिबंध नहीं लगाएंगे दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने गुरुवार सुबह ही कहा था, ‘GRAP-3 के प्रतिबंध लागू नहीं किए जाएंगे।’ दिल्ली में सुबह 6 बजे दिल्ली के 31 इलाकों में प्रदूषण बेहद खराब श्रेणी से गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। सबसे ज्यादा एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 567 जहांगीरपुरी में दर्ज किया गया।

इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आतिशी सरकार की निष्क्रियता के कारण प्रदूषण की स्थिति दिल्ली के आसपास के इलाकों से भी बदतर हो गई है। राजपथ जैसे इलाकों में भी AQI 450 से ज्यादा है। उन्होंने कहा- दिल्ली को लोग चाहते हैं कि गोपाल राय अपना पद छोड़ दें।

वहीं, गोपाल राय ने दावा किया कि दिल्ली की खराब एयर क्वालिटी में 35% योगदान भाजपाशासित हरियाणा और उत्तर प्रदेश के NCR में आने वाले जिलों का है।

दिल्ली में सबसे ज्यादा एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 567 जहांगीरपुरी में दर्ज किया गया।

दिल्ली में सबसे ज्यादा एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 567 जहांगीरपुरी में दर्ज किया गया।

प्रदूषण से बचने के लिए लोग मास्क पहने दिखे।

प्रदूषण से बचने के लिए लोग मास्क पहने दिखे।

क्या होता है ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) राजधानी में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए GRAP को 4 कैटेगरी में बांटा गया है। इसके तहत, अलग-अलग कदम उठाए जाते हैं।

  • GRAP-1: खराब (AQI 201-300)
  • GRAP-2: बहुत खराब (AQI 301-400‌)
  • GRAP-3: गंभीर ( AQI 401 से 450)
  • GRAP-4: बहुत गंभीर ( AQI 450 से ज्यादा)

आगे क्या: इन राज्यों में छाएगा बहुत घना कोहरा यूपी और पंजाब में 15 नवंबर तक, हिमाचल में 18 नवंबर तक रात सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाएगा। हरियाणा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड में 16 नवंबर तक धुंध छाने की संभावना है।

दावा- दिल्ली में 69% परिवार प्रदूषण से प्रभावित NDTV के मुताबिक, प्राइवेट एजेंसी लोकल सर्कल के सर्वे में दावा किया गया कि दिल्ली-NCR में 69% परिवार प्रदूषण से प्रभावित हैं। 1 नवंबर को जारी की गई इस रिपोर्ट में 21 हजार लोगों के जवाब थे। इसमें सामने आया कि दिल्ली-NCR में 62% परिवारों में से कम से कम 1 सदस्य की आंखों में जलन है।

वहीं, 46% फैमिली में किसी न किसी मेंबर को जुकाम या सांस लेने में तकलीफ (नेजल कंजेशन) और 31% परिवार में एक सदस्य अस्थमा की परेशानी है। पूरी खबर पढ़ें…

दिल्ली में 14 अक्टूबर को ग्रैप-1 लागू किया गया था दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में ग्रैप-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (BS -III पेट्रोल और BS-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं।

आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेन्टेनेन्स एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रिपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है।

AQI क्या है और इसका हाई लेवल खतरा क्यों AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) , PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है।

हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है।

क्या होता है PM, कैसे नापा जाता है PM का अर्थ होता है पर्टिकुलेट मैटर। हवा में जो बेहद छोटे कण यानी पर्टिकुलेट मैटर की पहचान उनके आकार से होती है। 2.5 उसी पर्टिकुलेट मैटर का साइज है, जिसे माइक्रोन में मापा जाता है।

इसका मुख्य कारण धुआं है, जहां भी कुछ जलाया जा रहा है तो समझ लीजिए कि वहां से PM2.5 का प्रोडक्शन हो रहा है। इंसान के सिर के बाल की अगले सिरे की साइज 50 से 60 माइक्रोन के बीच होता है। ये उससे भी छोटे 2.5 के होते हैं।

मतलब साफ है कि इन्हें खुली आंखों से भी नहीं देखा जा सकता। एयर क्वालिटी अच्छी है या नहीं, ये मापने के लिए PM2.5 और PM10 का लेवल देखा जाता है। हवा में PM2.5 की संख्या 60 और PM10 की संख्या 100 से कम है, मतलब एयर क्वालिटी ठीक है। गैसोलीन, ऑयल, डीजल और लकड़ी जलाने से सबसे ज्यादा PM2.5 पैदा होते हैं।

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