“तुम तो लड़कियों की तरह रोते हो” भूलकर भी बच्चों से न कहें 5 डायलॉग, दिमाग पर पड़ेगा बुरा असर! घर कर जाएंगी ये बातें!

“तुम तो लड़कियों की तरह रोते हो” भूलकर भी बच्चों से न कहें 5 डायलॉग, दिमाग पर पड़ेगा बुरा असर! घर कर जाएंगी ये बातें!

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आखरी अपडेट:13 फरवरी, 2025, 18:23 IST

Parenting Tips : बच्चों की परवरिश में माता-पिता का व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण होता है. बच्चों के सामने हमेशा सकारात्मक और समझदारी से बातें करनी चाहिए. इससे न सिर्फ बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि उनका ब्रेन ड…और पढ़ें

सोच समझ कर करें बच्चों के सामने बात!

हाइलाइट्स

  • बच्चों से नकारात्मक बातें न कहें.
  • बच्चों की तुलना दूसरों से न करें.
  • बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ावा दें.

पेरेंटिंग टिप्स: बच्चों को पालना एक बेहद चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारीपूर्ण काम है. बच्चों में न सिर्फ शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत तेज़ी से विकसित होते हैं. इस दौरान माता-पिता का मार्गदर्शन और उनके व्यवहार का बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ता है. बच्चों के दिमाग में सकारात्मक सोच को विकसित करने के लिए यह जरूरी है कि माता-पिता अपने व्यवहार पर ध्यान दें और यह सुनिश्चित करें कि उनका हर कदम बच्चों के विकास में सहायक हो.

कई बार बच्चों के साथ बातचीत करते समय हम ऐसी बातें कह देते हैं, जो बच्चों के ब्रेन डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकती हैं. यह जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के सामने कुछ खास बातों का ध्यान रखें और उन पर सावधानी से प्रतिक्रिया दें. आइए जानते हैं, बच्चों के सामने कौन सी बातें नहीं कहनी चाहिए और क्यों?

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1. लड़कियों की तरह रोना
यह एक सामान्य सी बात लग सकती है, लेकिन बच्चों के सामने यह कहना कि “तुम तो लड़कियों की तरह रोते हो,” गलत है. इस तरह के शब्द बच्चों में यह भावना पैदा कर सकते हैं कि रोना सिर्फ लड़कियों का अधिकार है. बच्चा अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है और हमें उसे इस भावना को दबाने के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए.

2. चाय पीने से काले हो जाओगे
जब बच्चा चाय पीने की जिद करता है, तो अक्सर माता-पिता इसे लेकर कहते हैं कि चाय पीने से रंग काला हो जाता है. यह एक खतरनाक बयान हो सकता है क्योंकि इससे बच्चों में रंगभेद की भावना पैदा हो सकती है. बच्चों को चाय के हानिकारक प्रभावों के बारे में समझाना बेहतर होता है, न कि उन्हें शारीरिक रूप से किसी रूप में कमतर महसूस कराना.

3. मिर्च से तुलना
कभी-कभी जब बच्चा गुस्से में होता है, तो माता-पिता यह कहते हैं कि “तेरा चेहरा मिर्च की तरह लाल हो गया है,” यह बच्चों पर नकारात्मक असर डाल सकता है. इस प्रकार की तुलना बच्चों के सेल्फ रिस्पैक्ट को प्रभावित कर सकती है. बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि गुस्सा न सिर्फ उन्हें नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उनका मेंटल पीस भी भंग कर सकता है.

4. बच्चों की बनावट पर कमेंट
यह अक्सर देखा जाता है कि बच्चों के शरीर या उनकी बनावट पर टिप्पणी की जाती है, जैसे “तुम बहुत मोटे हो” या “तुम बहुत पतले हो.” यह बच्चों की मानसिक स्थिति को बिगाड़ सकता है और उनके सेल्फ रिस्पैक्ट को नुकसान पहुंचा सकता है. यह जरूरी है कि बच्चों के रूप या आकार के बारे में कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें. उन्हें यह समझाने की जरूरत है कि उनका आत्म-मूल्य उनके रूप पर नहीं, बल्कि उनके कामों और विचारों पर आधारित होता है.

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5. दूसरे बच्चों से तुलना
कभी भी अपने बच्चे की किसी दूसरे बच्चे से तुलना न करें. अगर आप यह कहते हैं कि “देखो, रामू कितना अच्छा पढ़ता है, तुम्हें भी ऐसा करना चाहिए,” तो इससे बच्चे को हीन भावना महसूस हो सकती है. हर बच्चा अलग होता है और उसकी अपनी गति से विकास होता है. उन्हें उनकी अच्छाईयों के लिए सराहना दें, बजाय इसके कि किसी और से उनकी तुलना करें.

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