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जयपुर की इस 150 साल पुरानी दुकान में मिलते हैं मिट्टी के बेहतरीन आइटम, पूर्वज बनाते थे राजाओं के लिए बर्तन
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रिपोर्ट- अंकित राजपूत
जयपुर: राजस्थान का जयपुर अपने बाजारों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां के चारदीवारी बाजार में त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा रौनक रहती हैं. यहां की वर्षों पुरानी दुकानों और हाथों का हुनर रखने वाले कारीगरों के बनाए मिट्टी के कई प्रोडक्ट मिलते हैं. जयपुर बसावट के समय से ही यहां लोग पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पूर्वजों की कला को आगे बढ़ाते रहे हैं. ऐसे ही चारदीवारी बाजार के चौड़ा रास्ता में स्थित 150 साल से भी अधिक पुरानी दुकान नंबर 268 जयपुर हस्तकला केंद्र है. यहां एक ही परिवार के लोग मिट्टी के बर्तन तैयार करने का काम करते आ रहें हैं.
नवरात्रि और दिपावली पर यहां इनके मिट्टी के बर्तन खरीदने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. आपको बता दें ज्यादातर मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाने का काम कुम्हार जाति के लोग करते आ रहें हैं. ऐसे ही यह अनोखा परिवार भी वर्षों से मिट्टी के बर्तन तैयार करता आ रहा है. पुराने समय से ही मिट्टी के बर्तनों के उपयोग की परम्परा राजस्थान में चली आ रही है. आज भी त्यौहार के समय लोग सबसे ज्यादा मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करते हैं और सामान्य रूप से भी घरों में मिट्टी के बर्तनों का खूब इस्तेमाल किया जाता है.
150 साल से पुरूष और महिलाएं मिलकर बनाते हैं बर्तन
जयपुर हस्तकला केंद्र की दुकान जयपुर बसावट के समय की है. यहां पुरूषों के साथ महिलाएं भी बर्तन बनाती हैं. त्यौहारी सीजन में यहां के मिट्टी के बर्तन पूरे शहर में प्रसिद्ध हैं. यहां सालों से बर्तन बनाने का काम करते आ रहे नाथूलाल बताते हैं कि राजा महाराजाओं के समय उनके पूर्वज बर्तन बनाया करते थे. उसके बाद से परिवार की सभी पीढ़ियों ने बर्तन बनाने का काम किया जिसमें महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा रहती है. नाथूलाल बताते हैं कि उनके यहां मिट्टी से बने हुए सभी प्रकार के बर्तन और खिलौने बनाये जाते हैं. इनकी पूरे सालभर डिमांड रहती है. यहां एक ही जगह पर 50 से अधिक प्रकार के सुंदर मिट्टी के बर्तन तैयार किए जाते हैं जो हर जगह नहीं बनते हैं.
नवरात्रि और दिपावली में रहती हैं बर्तनों की सबसे ज्यादा डिमांड
नाथूलाल बताते हैं कि उनके यहां विशेष रूप से अलग-अलग प्रकार के मिट्टी से बर्तन बनाये जाते हैं. जिसमें लाल मिट्टी और काली मिट्टी के बर्तन सबसे ज्यादा बनते हैं. यहां मिट्टी के मटके, सुरई, तवा, मिट्टी के बने हुए सुंदर खिलौने और सजावटी सामान गमले, फूलदानी आदि मिलते हैं. इसके अलावा अलग-अलग प्रकार के कलश और 10 प्रकार के शानदार दीपक विशेष रूप से बनाये जाते हैं.
इन सभी बर्तनों की कीमत अलग-अलग होती है. यहां स्पेशल ऑडर पर भी बर्तन बनाये जाते हैं. यहां लोग पूजा के उपयोग में आने वाले बर्तनों को सबसे ज्यादा खरीदते हैं. इसलिए नवरात्रि और दिपावली से पहले देर रात तक बर्तनों को रंगने और सजाने का काम महिलाएं करती हैं.
टैग: स्थानीय18
पहले प्रकाशित : 4 अक्टूबर, 2024, रात 9:17 बजे IST
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