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सोनम वांगचुक बोले- BNS की धारा-163 लोकतंत्र पर धब्बा: अदालतों को ध्यान देना चाहिए; यह बिना परमिशन पब्लिक मीटिंग रोकती है
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नई दिल्ली21 मिनट पहले
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सोनम और उनके साथी लद्दाख से 30 दिन की पैदल यात्रा कर 30 सितंबर की रात दिल्ली पहुंचे थे।
दिल्ली में लद्दाख भवन के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रविवार को हिरासत में ले लिया। यहां जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 6 अक्टूबर से भूख हड़ताल कर रहे हैं।
दरअसल, दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू है। यह बिना परमिशन के पब्लिक मीटिंग पर रोक लगाती है। पहले कहा गया कि वांगचुक को भी हिरासत में लिया गया है, लेकिन पुलिस ने साफ किया उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है।
पुलिस कार्रवाई पर वांगचुक ने एक वीडियो संदेश में कहा-
दुखद है कि लोकतंत्र की जननी पर साल भर इस तरह का प्रतिबंध लगा रहता है। यह तभी लागू की जाती है जब कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो। ऐसी धाराएं स्थायी रूप से कैसे लगाई जा सकती है। यह हमारे लोकतंत्र पर धब्बा है। अदालतों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

वहीं, पुलिस ने कहा- प्रदर्शनकारियों को लद्दाख भवन के बाहर बैठने की परमिशन नहीं थी। वांगचुक ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए परमिशन मांगी है। उनकी एप्लीकेशन पेंडिग है। उन्हें किसी अन्य जगह पर प्रदर्शन करने की परमिशन भी नहीं है। हमने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, उन्हें जल्द छोड़ दिया जाएगा।

दिल्ली में BNS की धारा 163 लागू है। यह बिना परमिशन के पब्लिक मीटिंग पर रोक लगाती है।
जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं मिली तो लद्दाख भवन में हड़ताल पर बैठे जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत न मिलने पर नहीं मिली थी। इसके बाद सोनम ने 6 अक्टूबर को सुबह x पोस्ट में कहा- हम शांतिपूर्ण तरीके से अनशन करना चाहते हैं, लेकिन हमें इजाजत नहीं मिली। लद्दाख भवन में हमें डिटेन करके रखा गया है। हम यहीं से अनशन कर रहे हैं। सोनम ने कहा- सैकड़ों लोग लेह से दिल्ली चलकर आए हैं। इनमें महिलाएं, भूतपूर्व सैनिक, 75 साल के बुजुर्ग शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को 1 अक्टूबर को हिरासत में लिया था।
दिल्ली पुलिस ने दो बार हिरासत में लिया था सोनम अपनी मांगों को लेकर 1 सितंबर को दिल्ली तक पैदल मार्च पर निकले थे। 2 अक्टूबर को उनका मार्च राजघाट पर खत्म होना था। सोनम और 150 लोग 30 सितंबर की रात दिल्ली पहुंचे थे। वे दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर रात बिताना चाहते थे।
दिल्ली में 5 अक्टूबर तक धारा 163 लागू है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वापस जाने के लिए कहा गया। जब वे नहीं माने तो पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया। इसके बाद वांगचुक 1 अक्टूबर को थाने में ही अनशन पर बैठ गए।
उसी दिन थाने से छूटने के बाद वांगचुक रात में दिल्ली के सेंट्रल एरिया की ओर जा रहे थे। पुलिस ने उन्हे रोका, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद उन्हें दूसरी बार पुलिस ने हिरासत में लिया।
2 अक्टूबर को वांगचुक और उनके साथियों को छोड़ दिया था। थाने से बाहर आने के बाद वे दिल्ली पुलिस की निगरानी में राजघाट गए। वहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद सोनम ने कहा- हमने सरकार को एक ज्ञापन दिया है कि लद्दाख को संवैधानिक प्रावधानों के तहत संरक्षित किया जाए। मुझे गृह मंत्रालय ने आश्वासन दिया गया है कि आने वाले दिनों में, मैं पीएम या राष्ट्रपति से मिलूंगा। पूरी खबर पढ़ें…

2 अक्टूबर की देर रात सोनम दिल्ली में राजघाट पहुंचे और उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।
अनौपचारिक चर्चा हुई, लेकिन मुलाकात की तारीख नहीं दी सोनम ने कहा- हमने राजघाट पर अपना अनशन तोड़ था। शीर्ष नेताओं से मुलाकात पर अनौपचारिक चर्चा हुई। हमें मुलाकात का आश्वासन दिया था लेकिन कोई तारीख तक नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इसलिए हम राजघाट पर तोड़े अपने अनशन को दोबारा करने के लिए मजबूर हुए। हमें पीएम मोदी, गृह मंत्री शाह या राष्ट्रपति से मुलाकात का समय नहीं दिया गया है।
सोनम वांगचुक का 30 सितंबर का X पोस्ट
वांगचुक ने 30 सितंबर का रात हिरासत के बाद X पर पोस्ट शेयर की थी।
मुझे दिल्ली की बॉर्डर पर हिरासत में से लिया गया है। यहां 1,000 पुलिसवाले थे। हमारे साथ कई बुजुर्ग हैं। हमारे भाग्य क्या लिखा है, हमें नहीं पता। हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और लोकतंत्र की जननी में बापू की समाधि तक शांतिपूर्ण मार्च पर थे। हे राम।


सोमवार को पुलिस हिरासत में लेने के बाद वांगचुक को पुलिस ने बस में बैठाया। यहां उन्होंने एक वीडियो बनाकर X पर शेयर किया।
मार्च में सोनम वांगचुक ने 21 दिन की भूख हड़ताल की थी

सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य बनाने, स्थानीय लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण, लेह और कारगिल के लिए एक-एक संसदीय सीट और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर काफी समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसी साल मार्च में सोनम ने 21 दिन की भूख हड़ताल की थी। भूख हड़ताल खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा था- ये आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अपनी मांगों को लेकर हमें जब तक आंदोलन करना पड़े, हम करेंगे।
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वांगचुक बोले-लद्दाख में लोकतंत्र कम, हमसे तो पाकिस्तान बेहतर:बॉर्डर पर रहने वालों का दम घुटा, तो नुकसान होगा

दैनिक भास्कर ने लद्दाख के मुद्दों पर सोनम वांगचुक से बात की। उन्होंने कहा कि लद्दाख में लोकतंत्र की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान का भी जिक्र किया। पढ़िए पूरा इंटरव्यू। पूरी खबर पढ़ें
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